Raw vs pasteurized milk: क्या होत है पाश्चराइज्ड दूध? इसे उबालना चाहिए या नहीं?
Raw vs pasteurized milk: भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जो ग्लोबल उत्पादन का लगभग 24-25% योगदान देता है. दूध भारतीय आहार और संस्कृति का अहम हिस्सा है. चाहे रोजमर्रा का खाना हो या त्यौहार, दूध हर घर में सेफ और पौष्टिक पेय के रूप में इस्तेमाल होता है.
भारत में दूध का महत्व
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है. दूध भारतीय आहार का अहम हिस्सा है. ये सिर्फ रोजमर्रा की खुराक ही नहीं, बल्कि त्यौहारों और विशेष अवसरों में भी उपयोग होता है. इसलिए भारतीय खानपान में दूध की अहमियत बहुत ज्यादा होती है.
दूध का पारंपरिक आपूर्ति तरीका
पहले दूध सीधे दूधवाले से घरों में आता था. ये ताजा दूध घर पर उबालकर पीया जाता था. इस प्रक्रिया में दूध को पूरी तरह से उबालने से हानिकारक जीवाणु मर जाते थे और दूध सेफ बन जाता था.
व्हाइट रिवोल्यूशन और डेयरी उद्योग
व्हाइट रिवोल्यूशन के बाद भारत में दूध का उत्पादन तेजी से बढ़ा. इसके साथ ही कई बड़े डेयरी उद्योग और स्थानीय मिल्क फेडरेशन उभरे, जिन्होंने दूध और डेयरी उत्पादों का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया. अब दूध प्लास्टिक पैकेट में घरों तक पहुंचता है.
पाश्चराइज्ड दूध क्या है?
पाश्चराइज्ड दूध वो दूध है जिसे हानिकारक जीवाणुओं को मारने के लिए एक निश्चित तापमान पर गर्म किया जाता है. इस प्रक्रिया का नाम फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पाश्चर के नाम पर रखा गया. इसमें दूध को उच्च तापमान पर गरम किया जाता है और फिर जल्दी ठंडा किया जाता है. इससे दूध लंबे समय तक सेफ रहता है और अधिकतर पोषक तत्व बरकरार रहते हैं.
कच्चा दूध क्या है?
कच्चा दूध सीधे गाय, भैंस या अन्य जानवरों से लिया गया ताजा दूध होता है जिसे पाश्चराइज्ड नहीं किया गया होता. ये बिना किसी प्रक्रिया के घरों तक पहुंचता है और इसमें प्राकृतिक एंजाइम और लाभकारी बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं.
पाश्चराइज्ड दूध को उबालना चाहिए या नहीं?
FDA के अनुसार, पाश्चराइज्ड दूध पहले से ही सेफ होता है और इसे उबालने की जरूरत नहीं होती. हालांकि, भारत में अधिकांश लोग इसे कुछ मिनट उबालकर पीते हैं. शोध बताते हैं कि लंबे समय तक उबालने से कुछ पोषक तत्व जैसे विटामिन B12 कम हो सकते हैं, लेकिन थोड़े मिनट उबालने से बहुत बड़ा नुकसान नहीं होता.
दूध में मौजूद हानिकारक जीवाणु
कच्चे दूध में Salmonella, E. coli, Listeria, Campylobacter और Staphylococcus aureus जैसे जीवाणु हो सकते हैं. ये जीवाणु गलत हैंडलिंग, गंदगी या स्तनशोथ (mastitis) से दूध में प्रवेश कर सकते हैं. पाश्चराइज्ड इनसे सुरक्षा देता है, जबकि उबालने से भी ये जीवाणु मर जाते हैं.
उबालना सेफ है, लेकिन जरूरत नहीं
डॉ. विजय शर्मा के अनुसार, कम आंच पर दूध को कम से कम 5 मिनट उबालना इसे सेफ बनाता है. पाश्चराइज्ड दूध पहले से सेफ माना जाता है, लेकिन कुछ मिनट उबालने से दूध के पोषक तत्वों पर बड़ा असर नहीं पड़ता. इसलिए ये एक सेफ ऑप्शन है, खासकर घर पर यूज के लिए.