Navratri 2025 : हर नवरात्रि पर जिसकी डिमांड बढ़ती है, क्या आप जानते हैं कि वो साबूदाना कहां से आता है?
Navratri 2025 : नवरात्रि के दौरान व्रत-उपवास का बहुत महत्व होता है और ऐसे समय में साबूदाना (साबूदाना खिचड़ी, वड़ा, पापड़) जैसे खाद्य पदार्थों की मांग आसमान छूने लगती है. साबूदाना, जिसे टैपिओका से बनाया जाता है, भारत में विशेष रूप से कुछ राज्यों में बड़े पैमाने पर प्रोड्यूस होता है. आइए जानें उन पांच प्रमुख भारतीय राज्यों के बारे में जो नवरात्रि में आपकी थाली तक साबूदाना पहुंचाने में सबसे आगे हैं.
तमिलनाडु
तमिलनाडु देश का सबसे बड़ा टैपिओका प्रोड्यूस करने वाला राज्य है. यहां कुल भारतीय उत्पादन का लगभग 64% से 83.75% तक हिस्सा तैयार होता है. विशेषकर सेलम (Salem) क्षेत्र को टैपिओका और सैगो (साबूदाना) उत्पादन के लिए जाना जाता है. यहां की जलवायु और मिट्टी इस फसल के लिए बेहद सही मानी जाती है. व्रत में प्रयोग होने वाले साबूदाने का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है.
केरल
केरल टैपिओका उत्पादन में दूसरा स्थान रखता है. यहां के ग्रामीण क्षेत्रों में ये फसल पारंपरिक रूप से उगाई जाती है. केरल में टैपिओका न केवल व्रत के भोजन के लिए बल्कि पारंपरिक साउथ इंडियन व्यंजनों में भी खूब उपयोग किया जाता है. केरल का जैविक उत्पादन इसे और भी खास बनाता है.
आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश भी टैपिओका उत्पादन में अपना योगदान दे रहा है. हालांकि उत्पादन तमिलनाडु और केरल के मुकाबले कम है, फिर भी ये राज्य इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर आता है. यहां किसानों ने टैपिओका को नकदी फसल के रूप में अपनाया है, जिससे इसकी खेती धीरे-धीरे बढ़ रही है.
नागालैंड
पूर्वोत्तर भारत में स्थित नागालैंड टैपिओका उत्पादन में चौथे स्थान पर आता है. यहां की जलवायु और पारंपरिक खेती पद्धतियां इस फसल के लिए अनुकूल हैं. नागालैंड जैसे राज्यों से आ रहा उत्पादन ये दिखाता है कि अब ये फसल केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रही.
मेघालय
मेघालय, अपनी हरियाली और आदिवासी खेती परंपराओं के लिए जाना जाता है, टैपिओका उत्पादन में पांचवें स्थान पर है. यहां के किसान स्थानीय जरूरतों के साथ-साथ बाहरी बाजारों की भी आपूर्ति कर रहे हैं.