जेठालाल नहीं…ये हैंडसम हंक है बबीता जी का बेस्ट फ्रेंड, जिसके साथ सेट पर खूब मचाती हैं धमाल
एक शो ने बदली जिंदगी
जब तारक मेहता का उल्टा चश्मा शुरू हुआ, तो मुनमुन दत्ता ने कभी यह नहीं सोचा कि वह आगे जाकर भारतीय टेलीविजन की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सफलताओं में से एक बन जाएगा. वह काम मिलने से बस खुश थीं. कई नए कलाकारों की तरह, उन्हें भी रिजेक्शन और फाइनेंशियल मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था. उनके लिए यह फेम के बारे में नहीं थी.
दिलीप जोशी बनें सपोर्ट पिलर
मुनमुन ने सीनियर एक्टर दिलीप जोशी को सपोर्ट पिलर बताया. उन्होंने कहा कि कास्टिंग के समय उन्होंने काफी अहम भूमिका निभाई थी. जब मेकर्स कैरेक्टर फाइनल कर रहे थे, तो उन्होंने उनका नाम सुझाया था. सालों से वह अपने प्रोफेशनल रिश्ता सम्मान में तब्दील हो चुका है. मुनमुन के मुताबिक, उनकी बहुत पसंद की जाने वाली ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री के लिए काम करती हैं, क्योंकि यह कभी जबरदस्ती नहीं थी.
आराम और क्रिएटिविटी
जेठालाल-बबीता के यादगार पलों के पीछे एक इम्प्रोवाइजेशन है. मुनमुन ने कहा कि कई सीन रिहर्सल के दौरान बनते हैं. जिसमें दोनों एक्टर ह्यूमर और सच्चाई बढ़ाई के लिए आइडिया देते हैं. इस आजादी ने दिलीप जोशी के साथ काम करना मजेदार और क्रिएटिव रुप से संतोषजनक बताया. उनका लगातार प्रोत्साहन, एक एक्टर के तौर पर उनकी ग्रोथ को पहचानना, आज भी उनके लिए बहुत मायने रखता है.
एक मुश्किल शुरुआत
इंडस्ट्री में मुनमुन के शुरुआती दिन बिल्कुल भी आसान नहीं था. एक छोटे शहर से आकर उन्होंने बिना किसी जान-पहचान या सपोर्ट सिस्टम के मुंबई में अपना रास्ता बनाया. लंबे ऑडिशन की लाइन में खड़े होने से लेकर पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन में रहने तक, हर कदम पर हिम्मत की जरुरत थी. उन्हें याद है कि उनका पहला एक्टिंग असाइनमेंट काफी मुश्किल था. गलतियों और आंसुओं से भरा हुआ.
एक व्यक्तिगत नुकसान
मुनमुन को 2018 में एक व्यक्तिगत त्रासदी का सामना करना पड़ा था. जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया था. उनकी लंबी बीमारी और अचानक मौत ने एक्ट्रेस को गहरा सदमा पहुंचाया था. उन्होंने स्वीकार किया कि यह अनुभव अभी तक बहुत प्रभावित करता है. साथ ही उस दर्द को निजी रखना पसंद करती हैं. मुनमुन के लिए उस मुस्किल दौर में विश्वास और आत्म चिंतन काफी सहारा बने थे. जिसके बाद उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया.
अमित भट्ट के साथ दोस्ती
शो में चंपक चाचा का किरदार निभाने वाले अमित भट्ट कैमरे के पीछे बिल्कुल अलग हैं. इस बात का खुलासा खुद मुनमुन दत्ता ने किया है. वह उन्हें अपना अच्छा दोस्त में से एक कहती हैं. यह साबित करते हुए कि सबसे मजबूद रिश्ते अक्सर पर्दे के पीछे बनते हैं.
कड़ी मेहनत करती हैं बबीता जी
मुनमुन दत्ता की यात्रा इस बात की याद दिलाती है कि लंबे समय तक चलने वाली सफलता कड़ी मेहनत, विनम्रता और सच्चे मानवीय रिश्तों पर बनती है. दिलीप जोशी में एक मेंटर ढूंढने से लेकर अमित भट्ट के साथ हंसी-मज़ाक करने और पर्सनल दुख से उबरने तक सभी उनके किरदार से काफी ज्यादा है.