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बारिश होगी कम, जेब पर पड़ेगा असर! IMD का 2026 को लेकर बड़ा अलर्ट

Monsoon Rain forecast 2026: India Meteorological Department के अनुसार 2026 में मॉनसून सामान्य से कम (करीब 92%) रह सकता है, जिसकी बड़ी वजह El Niño का प्रभाव है. कई क्षेत्रों में कम बारिश और कुछ में सामान्य से अधिक वर्षा संभव है. कमजोर मॉनसून से खेती, महंगाई, ग्रामीण आय और ऑटो सेक्टर पर असर पड़ सकता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है.


By: Shubahm Srivastava | Published: April 13, 2026 8:09:00 PM IST

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IMD का मॉनसून पूर्वानुमान

India Meteorological Department ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को लेकर लंबी अवधि का पूर्वानुमान जारी किया है. इसके अनुसार इस साल देश में मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है. जून से सितंबर के बीच कुल वर्षा सामान्य के लगभग 92% (±5%) रहने का अनुमान है, जो 1971–2020 के औसत 87 सेमी पर आधारित है. यह संकेत देता है कि बारिश थोड़ी कम रह सकती है.

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अल नीनो का संभावित असर

मौसम विभाग ने बताया कि इस साल El Niño का प्रभाव देखने को मिल सकता है. अप्रैल से जून के बीच ENSO तटस्थ स्थिति रहने की संभावना है, लेकिन मॉनसून के दौरान अल नीनो के मजबूत होने के आसार हैं. यह स्थिति आमतौर पर बारिश कम और तापमान अधिक होने से जुड़ी होती है, जिससे मॉनसून कमजोर पड़ सकता है.

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किन क्षेत्रों में कैसी बारिश

IMD के अनुसार देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना है. हालांकि, पूर्वोत्तर भारत, उत्तर-पश्चिम के कुछ क्षेत्र और दक्षिण प्रायद्वीपीय हिस्सों में सामान्य से अधिक या बेहतर बारिश हो सकती है. यानी पूरे देश में स्थिति एक समान नहीं होगी, बल्कि क्षेत्रीय असमानता देखने को मिलेगी.

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हिंद महासागर की भूमिका

फिलहाल हिंद महासागर में Indian Ocean Dipole (IOD) की तटस्थ स्थिति बनी हुई है. यह मॉनसून के लिए अनुकूल संकेत माना जाता है और इससे समय पर मॉनसून के आने की संभावना बनी रहती है. हालांकि, अल नीनो के प्रभाव के चलते कुल वर्षा पर दबाव रह सकता है.

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सूखे जैसे हालात के संकेत

IMD ने स्पष्ट रूप से सूखा घोषित होने वाले क्षेत्रों की सूची नहीं दी है, लेकिन जिन इलाकों में कम बारिश की आशंका है, वहां सूखे जैसे हालात बन सकते हैं. इनमें उत्तर भारत के गंगा के मैदानी क्षेत्र, आसपास के पठारी इलाके, मध्य भारत के बड़े हिस्से और पश्चिम भारत के कुछ आंतरिक क्षेत्र शामिल हैं.

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कुछ इलाकों में राहत की उम्मीद

जहां देश के बड़े हिस्से में कम बारिश का अनुमान है, वहीं कुछ क्षेत्रों में बेहतर स्थिति की संभावना भी जताई गई है. पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे वहां कृषि और जल संसाधनों पर दबाव कम रह सकता है.

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खेती और खाद्य आपूर्ति पर असर

कमजोर मॉनसून का सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ेगा. कम बारिश से बुवाई और फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे कृषि लागत बढ़ेगी. इसका सीधा असर खाद्य आपूर्ति पर पड़ेगा और सब्जियों, दालों जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं. इससे आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा.

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उद्योग पर प्रभाव

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार कमजोर मॉनसून का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा. ग्रामीण आय घटने से खर्च कम होगा, जिससे पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है. इसका असर ऑटो सेक्टर तक भी पहुंचेगा—ट्रैक्टर और टू-व्हीलर की बिक्री में गिरावट आ सकती है. कुल मिलाकर, कम बारिश का असर देश की अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों पर देखने को मिल सकता है.