ICC U19 WC: टीम इंडिया के ये 5 शेर जिनपर रहेंगी सभी की निगाहें; एक ने तोड़ा 20 साल पुराना रिकॉर्ड, दूसरा 14 की उम्र में बना ‘रन मशीन’!
15 जनवरी 2026 से भारत ने बुलावायो के क्वींस स्पोर्ट्स क्लब से पुरुष अंडर-19 वर्ल्ड कप का अभियान शुरू किया है. आइए आपको उन पांच खिलाड़ियों के बारे में बताते हैं जो इस टूर्नामेंट में टीम इंडिया के लिए अहम भूमिका निभाएंगे और जिन पर पूरे टूर्नामेंट में ध्यान और उम्मीदें बराबर बनी रहेंगी। यह सिर्फ़ एक मैच या टूर्नामेंट नहीं होगा, बल्कि यह इस बात का संकेत होगा कि भारतीय क्रिकेट का अगला अध्याय किस दिशा में जा रहा है. आगे चलकर कौन भारतीय टीम का रोहित-विराट होने वाला है. भारतीय क्रिकेट का इतिहास बताता है कि अंडर-19 स्टेज सिर्फ़ ट्रॉफ़ी जीतने की जगह नहीं है, बल्कि स्टार बनाने की फ़ैक्ट्री है. विराट कोहली ने यहीं आत्मविश्वास सीखा, शुभमन गिल को यहीं मौका मिला। अब, उस लाइन में नया नाम खड़ा है जैसे वैभव सूर्यवंशी, आयुष म्हात्रे और भी कई नाम आइये देखते हैं.
वैभव सूर्यवंशी
सिर्फ़ 14 साल की उम्र में, एक बाएं हाथ का बल्लेबाज़, जिसकी सोच बताती है कि उम्र कोई मायने नहीं रखती. वैभव की बल्लेबाज़ी की सबसे खतरनाक बात उनका निडर होना नहीं, बल्कि उनका शॉट सिलेक्शन है. वह सिर्फ़ छक्कों से ही डर नहीं पैदा करते, बल्कि सिंगल लेकर गेंदबाज़ों की योजनाओं को भी बिगाड़ देते हैं. जब वह विकेट पर जम जाते हैं, तो विपक्षी टीम के लिए खेल जीतने से ज़्यादा नुकसान कम करने का हो जाता है. अगर वह शुरुआती ओवरों में खुद को समय देते हैं और रन बनाने के लिए गैप ढूंढते हैं, तो यहीं से अंडर-19 क्रिकेट में सीनियर क्रिकेट की झलक दिखनी शुरू हो जाती है. भारत के लिए, वह सिर्फ़ मैच विनर ही नहीं, बल्कि भविष्य की नींव भी हो सकते हैं.
आयुष म्हात्रे
इस पूरी कहानी के बैकग्राउंड में एक शांत दिमाग है: कप्तान आयुष म्हात्रे. उनकी बल्लेबाज़ी का असली मूल्य बड़े शॉट्स में नहीं, बल्कि सही समय पर लिए गए फ़ैसलों में है. उन्हें पता है कि कब रिस्क लेना है और कब वैभव जैसे टैलेंट को आज़ादी से खेलने देना है. अगर भारत शुरुआती दौर में दबाव में आता है, तो वह वही खिलाड़ी हैं जो पारी को पटरी पर लाते हैं.
अभिज्ञान कुंडू
युवा क्रिकेट में, एक विकेटकीपर-बल्लेबाज़ अलग लेवल का खिलाड़ी होता है, और अभिज्ञान कुंडू उसी कैटेगरी में आते हैं. अगर टॉप ऑर्डर फेल हो जाता है, तो वह पारी को संभाल सकता है, और अगर एक प्लेटफॉर्म सेट हो जाता है, तो वह स्कोर को 280 या 300 के पार ले जा सकता है. विकेट के पीछे उसकी एनर्जी पूरी टीम का हौसला बढ़ाती है.
कनिष्क चौहान
वनडे मैच अक्सर 11 से 40 ओवर के फेज में जीते जाते हैं, और कनिष्क चौहान उसी फेज का खिलाड़ी है. उसकी ऑफ-स्पिन सिर्फ टर्न पर निर्भर नहीं करती, बल्कि पेस में वेरिएशन और सटीक लाइन पर निर्भर करती है. बल्ले से, वह एक "ठीक-ठाक" स्कोर को "खतरनाक" स्कोर में बदल सकता है.
डी. दीपेश
हर मजबूत टीम में एक तेज गेंदबाज होता है जो शुरुआत में ही जाल बिछाता है. दीपेश वह भूमिका निभाता है. नई गेंद से स्विंग, सही लेंथ, और फिर डेथ ओवर्स में समझदारी भरी गेंदबाजी अगर वह इन दोनों पहलुओं को मिला पाता है, तो यह भारत को बढ़त दिलाने के लिए काफी होगा.
वैभव सूर्यवंशी
इन सबके बीच, इस मुकाबले की असली जान वैभव सूर्यवंशी है. यह वही मंच है जहां से भारतीय क्रिकेट ने पहले भी अपने भविष्य को पहचाना है. अगर वैभव यहां खुद को साबित करता है, तो यह सिर्फ अंडर-19 वर्ल्ड कप की शुरुआत नहीं होगी; यह टीम इंडिया तक ले जाने वाले लंबे सफर का पहला कदम होगा.