Holi 2026 Special Recipe: होली के दिन बनाएं ये खास डिश, उंगली चाट-चाट के खाएंगे लोग
Holi Special Recipe: होली का त्योहार रंग, उमंग और स्वाद का संगम है. इस खास अवसर पर पारंपरिक व्यंजनों की महक हर घर में फैल जाती है. गुजिया और दही बड़े के साथ कांजी वड़ा भी होली की शान माना जाता है. खट्टा-तीखा और हल्का मसालेदार स्वाद वाला ये व्यंजन न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है, बल्कि पाचन के लिए भी लाभकारी माना जाता है. आइए विस्तार से जानें इसे बनाने की विधि.
कांजी वड़ा का पारंपरिक महत्व
कांजी वड़ा उत्तर भारत, विशेषकर राजस्थान में होली पर बनाया जाने वाला पारंपरिक व्यंजन है. ये फर्मेंटेड कांजी और दाल के नरम वड़ों का अनोखा संगम है, जो त्योहार की थाली को खास बनाता है.
कांजी के स्वास्थ्य लाभ
कांजी प्राकृतिक रूप से फर्मेंटेड पेय है, जिसमें प्रोबायोटिक गुण पाए जाते हैं. ये पाचन तंत्र को मजबूत करने, गैस और अपच से राहत देने तथा शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक मानी जाती है.
कांजी बनाने की आवश्यक सामग्री
कांजी के लिए 2–4 लीटर उबला व ठंडा पानी, 2 बड़े चम्मच दरदरी पिसी राई, 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा छोटा चम्मच हल्दी, काला नमक, सफेद नमक और चुटकी भर हींग लें. स्वाद और रंग के लिए गाजर व चुकंदर भी डाल सकते हैं.
कांजी तैयार करने की विधि
एक साफ कांच के बर्तन में पानी और सभी मसाले अच्छी तरह मिलाएं. बर्तन को ढककर 3–4 दिन धूप में रखें और रोज एक बार साफ चम्मच से चलाएं. हल्की खटास आने पर कांजी तैयार मानी जाती है.
वड़ा बनाने की सामग्री
वड़े के लिए 1 कप धुली उड़द या मूंग दाल, स्वादानुसार नमक, बारीक कटी हरी मिर्च, कद्दूकस किया अदरक, थोड़ी सौंफ और तलने के लिए पर्याप्त तेल लें.
वड़ा बनाने की विधि
दाल को 4–6 घंटे भिगोकर बारीक पीस लें और मिश्रण को अच्छी तरह फेंटें ताकि वड़े मुलायम बनें. गरम तेल में छोटे-छोटे वड़े तलें. तले हुए वड़ों को 10 मिनट गुनगुने पानी में भिगोकर हल्का निचोड़ लें.
कांजी वड़ा तैयार करने का लास्ट स्टैप
तैयार वड़ों को खट्टी कांजी में डालकर एक दिन ढककर रखें ताकि वे पूरा स्वाद सोख लें. 3–4 दिन बाद कांजी का स्वाद निखर जाए तो इसे ठंडा करके परोसें. ऊपर से भुना जीरा या हरी धनिया डालकर स्वाद बढ़ा सकते हैं.