वास्तविक जीवन के अरबपतियों पर आधारित 7 फ़िल्में: 7 movies based on real-life billionaires
हर इंसान के दिल में एक सपना होता है – अमीर बनने का कुछ बड़ा करने का, नाम कमाने का, और दुनिया को बदलने का। कुछ लोग इन सपनों को सच कर दिखाते हैं और अपनी मेहनत से अमीर बन जाते हैं। आज हम बात कर रहे हैं उन असल ज़िंदगी के हीरो की, जिनकी ज़िंदगी पर आधारित बनी 7 बेहतरीन हिंदी फिल्में हमें इंस्पायर करती हैं।
गुरु
यह फिल्म बहुत लोगों की प्धीरूभाई अंबानी (Reliance Industries के संस्थापक)गुरुकांत देसाई एक छोटे से गाँव से आता है। उसके पिता एक स्कूल टीचर होते हैं और वह गुरू से कहते हैं कि वह कभी कुछ नहीं कर पाएगा। लेकिन गुरु के पास एक सपना होता है , बड़ा आदमी बनने का।
कलाकार: अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय
निर्देशक: मणि रत्नम एक छोटे व्यापारी के सपनों से लेकर भारत के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शुमार होने की कहानी।
इस फिल्म का मुख्य उद्देश्य है सपनों की कोई सीमा नहीं होती।
सुपर 30
एक शिक्षक जो गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाकर उन्हें IIT जैसी बड़ी परीक्षाओं में सफल बनाता है।
इससे यह शिक्षा मिलती है असली अरबपति वो होता है जो समाज को वापस लौटाए।
द बिग बुल
यह फिल्म बहुत प्रभावित करती है कि लोग अपने सपने कहीं से भी पूरे कर सकते हैं यर बाजार का राजा बनने की कहानी, जिसमें लालच और घोटाले का एक अलग ही रंग है इससे हमे यह शिक्षा मिलती है कि दिमाग और चालाकी आपको ऊँचाई तक ले जा सकती है, पर नैतिकता भी ज़रूरी है।
गैंग्स ऑफ वासेपुर
यह फिल्म अपराध और राजनीतिक और व्यापार एक साथ जुड़कर एक आदमी को करोड़पति बना सकते हैं यह फिल्म कोयला माफिया और धनबाद की रियल कहानियों पर है इस फिल्म से यह शिक्षा मिलती हैं , धन की दुनिया के पीछे छुपा अंधकार भी होता है।
स्कैम 1992
द हर्षद मेहता स्टोरी (वेब सीरीज) 1992 के भारतीय शेयर बाजार घोटाले पर आधारित एक वेब सीरीज,सुचेता दलाल और उनके द्वारा आधारित है इस पर एक आदमी हर्षित मेहता जो स्टॉक मार्केट में अपनी किस्मत आजमाता है।
सांड की आँख
ये कहानी है एक दादी की, जिसने 60 साल की उम्र में बंदूक उठाई, और समाज को दिखा दिया कि सपने कभी बूढ़े नहीं होते।
जब पोती ने कहा कि लोग हँसते हैं – दादी ने मुस्कराकर कहा, 'तो उन्हें जीतकर जवाब देना सीख।'
गाँव वालों ने मज़ाक उड़ाया, लेकिन दादी ने एक के बाद एक निशाना साधा – गोल्ड मेडल तक पहुँच गई।
हमें बस एक बात याद रखनी है –
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
उम्र कोई बंदिश नहीं, हौसले का नाम है ज़िंदगी।
तुम जहाँ हो, जैसे हो – बस हिम्मत मत छोड़ना।
शुरुआत कभी भी हो सकती है।"
सोशल नेटवर्क
एक साधारण कॉलेज स्टूडेंट कैसे दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी बनाता है, और कैसे दोस्ती से लेकर दुश्मनी तक की लड़ाई लड़ता है। इससे यह प्रेरणा मिलती है,एक आइडिया आपकी ज़िंदगी बदल सकता है।
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. inkhabar इसकी पुष्टि नहीं करता है.