सऊदी में एक दिन पहले, तो भारत में एक दिन बाद क्यों मनाते हैं ईद? जानिए इस्लामी शरिया का नियम
Eid-Ul-Fitr: मुसलमानों के सबसे बड़े त्योहार ईद-उल-फितर पर बाजार में चहल पहल देखने को मिल रही है. घरों में पकवान बनने लगे हैं, रमजान का महीना अब अपने अंतिम दिनों पर है. मीठी ईद या सेवईं ईद के नाम से पहचाने वाले इस पर्व को लेकर हर साल की तरह इस बार भी सवाल खड़ा है, कि आखिर भारत में सऊदी अरब में चांद देखे जाने के अगले दिन ही ईद क्यों मनाई जाती है?
ईद को लेकर खड़ा हुआ सवाल
रमजान का महीना अब खत्म होने वाला है. मीठी ईद या सेवईं ईद के नाम से पहचाने जाने वाले पर पर्व हर साल की तरह इस बार भी सवाल खड़ा है, कि आखिर भारत में सऊदी अरब में चांद देखे जाने के अगले दिन ही ईद क्यों मनाई जाती है?
क्यों भारत में अगले दिन मनती है ईद?
ईद के अवसर पर अक्सर लोग सोचते हैं कि जब मक्का और मदीना जैसे पाक स्थल सऊदी अरब में है, तो भारत में उनके साथ ही ईद क्यों नहीं मनाई जाती है? दरअसल, इसके पीछे वैज्ञानिक, भौगोलिक और धार्मिक कारण हैं. ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा (बकरीद) जैसे इस्लामी त्योहार चंद्रमा दिखने पर आधारित होते हैं. जिसे हिलाल परंपरा कहा जाता है. सऊदी अरब और भारत के बीच ईद की तारीखों में अंतर के कई कारण है.
भौगोलिक स्थिति का अंतर
सऊदी अरब की भौगोलिक स्थिति के आधार पर भारत के पश्चिम में स्थित है. पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व दिशा की तरफ घूमती है. खगोलीय विज्ञान के मुताबिक, नया चंद्रमा पहले पश्चिमी देशों में नजर आता है. जैसे-जैसे समय बीतता है, वह पूरब की और दिखाई देना शुरु होता है, सऊदी अरब भारत से पश्चिम दिशा में है. वहां चांद दिखने की संभावना भारत से कुछ घंटे पहले होती है. सऊदी का टाइमजोन भारत से ढाई घंटे पीछे है.
चंद्रमा के चक्र का खास महत्व
इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा की गति पर चलता है, यह लगभग 29.5 दिनों तक का होता है. इसलिए एक महीना या तो 29 दिन का होता है या 30 दिन का. अगर सऊदी अरब में 29वें दिन की शाम को चांद नजर आता है. तो वहां अगले दिन ईद होती है. लेकिन उसी शाम भारत में शाम हो चुकी होती है और अक्सर चांद की उम्र इतनी नहीं होती है, कि वह नग्न आंखों से दिखाई दे सकें. इसलिए भारत में 30 दिन पूरे होने का इंतजार किया जाता है.
‘रुयते हिलाल’ क्या है?
इस्लामी कानून (शरिया) में ईद मनाने के लिए चांद देखना महत्वपूर्ण माना जाता है. इसको रुयते हिलाल भी कहा जाता है. जिसमें शफीई विचारधारा विचारधारा काफी अहम मानी जाती है. जिसके मुताबिक, हर क्षेत्र को अपने खुद के चंद्रमा दर्शन का पालन करना चाहिए. भारत में मरकजी हिलाल कमेटियां स्थानीय गवाहों और वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर ईद का ऐलान किया जाता है.
क्यों है यह अंतर?
यह अंतर प्रकृति के नियम के कारण है, जिस तरह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सूर्यादय का समय अलग होता है, ठीक उसी तरह से चांद दिखने का भी समय अलग होता है. इसी कारण सऊदी अरब और भारत के बीच आमतौर पर 24 घंटे यानी एक दिन का अंतर होता है.
20 या 21 मार्च को मनाई जाएगी ईद
ईद का त्योहार चांद दिखने पर ही तय होता है. इस बार भी लोग ईद की तारीख को लेकर काफी कन्फ्यूज हैं. माना जा रहा है कि ईद 20 या फिर 21 मार्च को मनाई जा सकती है. अगर रमजान के 29वें रोजे की शाम चांद दिखाई दे जाता है तो ईद अगले दिन को मनाई जाएगी. लेकिन चांद नहीं दिखता तो रमजान अपने 30 दिनों का पूरा करेगा और ईद का जश्न होगा.