8th Pay Commission: क्या 20,000 तक बढ़ेगा मेडिकल भत्ता और 7% इंक्रीमेंट; सरकार से कर्मचारियों की डबल डिमांड
8th Central Pay Commission: केंद्र सरकार द्वारा पिछले वर्ष नवंबर में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन और उसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस अधिसूचित किए जाने के बाद से केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि आयोग के गठन का स्वागत किया गया, लेकिन कई कर्मचारी संगठनों ने असंतोष भी जताया है. उनका कहना है कि उनकी प्रमुख मांगें वेतन आयोग के मौजूदा ढांचे में पूरी तरह से शामिल नहीं की गई हैं.
फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को बढ़ाने का प्रस्ताव
जैसे-जैसे वेतन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, कर्मचारियों की अपेक्षाएं भी बढ़ती जा रही हैं. अब चर्चा केवल फिटमेंट फैक्टर या मूल वेतन संशोधन तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य वित्तीय और सेवा-संबंधी लाभों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. सबसे प्रमुख मांगों में ‘फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस’ (एफएमए) को बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है.
वर्तमान मेडिकल भत्ता बेहद कम
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जो कर्मचारी और पेंशनभोगी सीजीएचएस (केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना) क्षेत्रों से बाहर रहते हैं, उन्हें वर्तमान में 1,000 रुपये प्रति माह का मेडिकल भत्ता मिलता है, जो बढ़ती चिकित्सा महंगाई के मुकाबले बेहद कम है.
20,000 रुपये प्रति माह की मांग
इसलिए इसे बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह किए जाने की मांग की गई है. यूनियनों का तर्क है कि विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनभोगियों के लिए मौजूदा राशि पर्याप्त नहीं है.
7 प्रतिशत इंक्रीमेंट बढ़ाने का प्रस्ताव
इसके अलावा वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव सामने आया है. कर्मचारियों का मानना है कि महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए मौजूदा वृद्धि दर अपर्याप्त है.
औपचारिक कार्यवाही शुरू
वेतन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में अपनी औपचारिक कार्यवाही शुरू कर दी है. आयोग ने जनपथ स्थित चंद्रलोक भवन में कार्यालय स्थापित कर लिया है.
एक करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों का एक संयुक्त चार्टर तैयार
हाल ही में एनसी-जेसीएम (नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी) की स्टाफ साइड ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक में लगभग एक करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मांगों का एक संयुक्त चार्टर तैयार किया गया.
ये मांगे भी रखी गई हैं
इस चार्टर में 2.25 के फिटमेंट फैक्टर की मांग, लीव इनकैशमेंट की सीमा 300 दिनों से बढ़ाकर 400 दिन करने का प्रस्ताव, वेतन गणना के लिए परिवार इकाइयों की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच करना और एलटीसी के नकद भुगतान जैसे सुझाव शामिल हैं.
ओपीएस बहाल करने की मांग
साथ ही एनपीएस और यूपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की मांग भी दोहराई गई है. फिलहाल सरकार ने इन मुद्दों पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है और अब सभी की नजर आयोग की सिफारिशों पर टिकी है.