जब Romance बन जाए आदत, जानें सेक्स की लत के डरावने लक्षण जो कर सकते हैं रिलेशनशिप को तबाह
सेक्स की लत पर समाज और विशेषज्ञों की राय अब भी अलग- अलग है. जहां निकोटीन, शराब और ड्रग्स की लत को बीमारी मान लिया गया है, वहीं सेक्स एडिक्शन को अब तक मानसिक रोगों की आधिकारिक सूची में जगह नहीं मिली. 2013 में DSM-5 में इसे शामिल करने की कोशिश हुई लेकिन सबूतों की कमी के कारण इसे छोड़ दिया गया. हालांकि अब WHO इसे “कंपल्सिव सेक्शुअल बिहेवियर” के रूप में ICD में शामिल करने पर विचार कर रहा है. कई विशेषज्ञ इसे मूड और मानसिक तनाव से जुड़ी समस्या मानते हैं, न कि लत. असली चुनौती यह है कि जब तक इसे औपचारिक रूप से बीमारी नहीं माना जाएगा, लोग इलाज के लिए आगे नहीं आएंगे.
मार्क ट्वेन और लत का मजाक
अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन ने कहा था “सिगरेट छोड़ना आसान है, मैंने यह काम सौ बार किया.” भले ही यह कथन सही हो या न हो, लेकिन यह लत की असलियत को उजागर करता है. हम शराब, निकोटीन और ड्रग्स की लत को बीमारी मान चुके हैं, लेकिन जब बात सेक्स की आती है तो समाज और विज्ञान दोनों बंटे हुए नज़र आते हैं.
सेक्स एडिक्शन पर समाज की राय
शराब या ड्रग्स की तरह सेक्स की लत पर खुलकर चर्चा कम होती है. कई लोग इसे सामान्य यौन इच्छा मानते हैं, तो कई लोग इसे गंभीर मानसिक समस्या बताते हैं.
सर्वे से खुलासा
ब्रिटेन में हुए एक ऑनलाइन सर्वे में सामने आया कि 91% लोग, जो सेक्स और पोर्न की लत से परेशान थे, पुरुष थे. लेकिन इनमें से केवल 10 लोगों ने डॉक्टर से मदद मांगी. इसका मतलब है कि लोग अब भी इस समस्या को छिपाना पसंद करते हैं.
मेडिकल मैनुअल में जगह की जंग
2013 में जब "डायग्नोस्टिक एंड स्टैटिस्टिकल मैनुअल ऑफ मेंटल डिसऑर्डर्स" (DSM) अपडेट हुआ, तब सेक्स की लत को शामिल करने पर विचार हुआ. लेकिन पर्याप्त सबूत न होने के कारण इसे बीमारी की कैटेगरी में नहीं रखा गया.
WHO का अगला कदम
अब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) "कंपल्सिव सेक्शुअल बिहेवियर" को "इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ़ डिजीज़" (ICD) में शामिल करने की तैयारी कर रहा है. अगर यह आधिकारिक रूप से शामिल हो गया तो सेक्स एडिक्शन को भी बीमारी माना जाएगा.
दिमाग में ड्रग्स जैसा असर
शोध बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति पोर्न देखता है तो उसके दिमाग में वही उत्तेजना होती है, जैसी किसी नशे के आदी इंसान के दिमाग में ड्रग्स देखने पर होती है. यही कारण है कि इसे कई विशेषज्ञ लत मानते हैं.
आदत
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी लत की दो पहचान होती हैं – आनंद पाने की चाह और उस व्यवहार के इर्द-गिर्द संघर्ष. जबकि OCD जैसे बाध्यकारी व्यवहार में आनंद नहीं मिलता. सेक्स एडिक्शन को इसी अंतर के आधार पर समझा जा सकता है.
मनोवैज्ञानिकों की राय
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि जब सेक्स की चाह इतनी बढ़ जाए कि उससे व्यक्ति और उसके आसपास के लोग प्रभावित होने लगें, तभी इसे लत कहा जा सकता है. यानी, अगर यह आपके रिश्तों, काम या मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाले तो इसे गंभीर मानना चाहिए.
क्या यह सिर्फ झुठ है?
कुछ थेरेपिस्ट मानते हैं कि सेक्स की लत कोई बीमारी नहीं बल्कि मूड, कुंठा और मानसिक तनाव का नतीजा है. उनके अनुसार, शराब या ड्रग्स की तरह यह शारीरिक रूप से घातक नहीं है, इसलिए इसे बीमारी कहना गलत होगा.
अब भी जारी है बहस
बहुत से लोग सेक्स और पोर्न की लत से परेशान हैं. अगर इसे औपचारिक रूप से बीमारी मान लिया जाए तो लोग खुलकर इलाज के लिए सामने आएंगे. चाहे यह बीमारी हो या गहरी समस्या का लक्षण, मदद लेना हमेशा सही कदम है.
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