ड्यूटी से गायब सरकारी कर्मचारी! क्या जा सकती है नौकरी? जानिए नियम
Government Employees Rules: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में जीएसटी कार्यालय का अचानक से निरीक्षण किया था. जिसके बाद ऑफिस में हलचल मच गई. जांच के दौरान कई कर्मचारी अपनी सीट पर नहीं थे. साथ ही कई कैमरे भी बंद पाए गए. सीएम रेखा ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को तलब किया और व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया, इस बीच आइए जानते हैं कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं मिलता तो उसे क्या सजा दी जा सकती है?
गंभीर अपराध
सरकारी सेवा में बिना पूर्व अनुमति के अनुपस्थित रहना अनुशासनहीनता होती है. केंद्रीय सिविल सेवा के नियमों में उपस्थिति और अनुशासन एक अहम कर्तव्य है. सजा इस बात पर निर्भर करती है कि क्या उसके पास वैध कारण है और कर्मचारी कितने दिन से उपस्थित नहीं था.
प्रारंभिक कार्रवाई
प्रारंभिक कार्रवाई के तौर पर पहले कर्मचारियों को औपचारिक नोटिस दिया जाता है. अधिकारी अनुपस्थित के संबंध में वजह मांगते हैं. अगर जवाब से संतोष नहीं मिलता तो सख्त कार्रवाई की जाती है.
वेतन में कटौती
कर्मचारी की वेतन में सबसे पहले कटौती की जाती है. अनुपस्थिति की अवधि को डाईज नॉन के तौर पर बताया जा सकता है. यानी उन दिनों के लिए वेतन नहीं दिया जाएगा. इसके साथ ही अवधि प्रमोशन और वेतन में बढ़ोतरी या फिर पेंशन लाभों में नहीं गिनी जाती है.
निलंबन या कम सैलरी
अगर मामला गंभीर है, तो कर्मचारियों को निलंबित किया जा सकता है. इसी के साथ निलंबन के दौरान पूरा वेतन नहीं दिया जाता है. जांच पूरी होने तक केवल 50 प्रतिशत वेतन मिलता है.
विभागीय जांच
अगर अनुशासनहीनता जारी रहती है, या फिर जानकर किया गया काम लगता है. तो इस मामले में आरोप पत्र भी जारी किया जा सकता है. एक विभागीय जांच की जाती है, जिसमें सभी सबूतों की जांच होती है. कोई भी आखिरी फैसला लेने से पहले कर्मचारियों बचाव करने का आखिरी मौका दिया जाता है.
सख्त कार्रवाई
अगर कोई कर्मचारी बिना अनुमति के एक साल से अधिक समय तक अनुपस्थित रहता है, तो उसे इस्तीफा दिया हुआ माना जा सकता है.
पांच सालों तक अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई
पांच सालों तक अगर कोई कर्मचारी अनुपस्थित रहता है, तो उसे सेवा से तत्काल हटाया जा सकता है. अगर जांच में जानबूझकर की गई लापरवाही सामने आती है, तो पद से हटाया जा सकता है.