Shopkeeper Cheated On Labour: यह मुद्दा केवल एक गलत लेन-देन का नहीं, बल्कि ‘नैतिक पतन’ का है शहरों में एक पेंटर या मजदूर की औसत दिहाड़ी ₹500 से ₹700 होती है, ₹2050 का नुकसान मतलब उसके घर का राशन, बच्चों की फीस या किसी जरूरी दवाई का पैसा डूब जाना ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट’ (Consumer Protection Act) के तहत खराब सामान बेचना अपराध है और ग्राहक को उसे बदलने या रिफंड पाने का पूरा अधिकार है, चाहे वह एक छोटा मजदूर ही क्यों ना हो, दुकानदार का हंसना यह दिखाता है कि उसे कानून का कोई खौफ नहीं है और वह जानता है कि एक गरीब मजदूर कानूनी पचड़ों में नहीं पड़ पाएगा, ऐसे बेईमानों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार और कानूनी कार्रवाई जरूरी है ताकि भविष्य में कोई किसी गरीब की ‘रोटी’ पर हाथ डालने की हिम्मत ना करे, यह घटना समाज में बढ़ती उस निर्दयता को दर्शाती है जहां रसूखदार लोग गरीबों के हक को डकारने में गर्व महसूस करने लगे हैं.
4