Holika Dahan Wheat Ritual: होलिका दहन में गेंहूं क्यों भुनते हैं लोग? जानिए क्या है उसका महत्व?
Wheat offering Holi: होली के अवसर पर होलिका दहन में गेंहूं की बालियां (गेंहूं के दाने/कानों) भूनकर अग्नि को अर्पित की जाती हैं. ये रिवाज नए फसल के लिए आभार व्यक्त करने, समृद्धि और खुशियां लाने का प्रतीक है. ये परंपरा सर्दी से वसंत में संक्रमण का संकेत देती है.
फसल के लिए आभार
नए रबी फसल, विशेषकर गेंहूं, के पकने पर इसे अग्नि में अर्पित करके भगवान का धन्यवाद किया जाता है. ये नए साल में बंपर फसल और खुशहाली की कामना का प्रतीक है.
समृद्धि का प्रतीक
भुनी हुई गेंहूं को घर लाकर रखने से इसे पवित्र माना जाता है. ये समृद्धि लाने और बुरी शक्तियों से सुरक्षा देने वाला माना जाता है.
स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता
इस रिवाज को वातावरण को शुद्ध करने और अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने से जोड़ा गया है. भुनी हुई गेंहूं के औषधीय गुण भी माने जाते हैं.
सांस्कृतिक परंपरा
कृषि समुदायों में ये प्रथा गहरी जड़ें रखती है. पहले फसल की बालियां देवताओं को अर्पित की जाती हैं और फिर उनका सेवन किया जाता है.
वसंत के आगमन का संकेत
भुनी हुई बालियां सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक हैं, जो जीवन में नए उत्साह और ऊर्जा लाती हैं.
परिवार में सौभाग्य
भुनी हुई गेंहूं घर में रखने से इसे परिवार में सुख, शांति और आर्थिक स्थिरता लाने वाला माना जाता है.
प्रसाद के रूप में सेवन
होलिका दहन से भुनी हुई गेंहूं को लोग घर ले जाकर खाते हैं. इसे प्रसाद माना जाता है, जो स्वास्थ्य, आशीर्वाद और समृद्धि का प्रतीक है.