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अब 22 राज्यों में चलेगा SIR अभियान, नागरिकता व पहचान के इन दस्तावेजों को रखें तैयार

ECI On SIR: भारत में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चुनाव आयोग ने एक बार फिर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है. भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने अपने सभी राज्य चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस व्यापक अभियान के लिए तैयार रहें. आयोग के अनुसार अप्रैल महीने से देशभर में SIR की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी. बिहार में यह प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है, जबकि कई अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह काम जारी है. अब बाकी बचे राज्यों में भी इसे पूरा किया जाएगा.


By: Shubahm Srivastava | Published: February 19, 2026 11:04:14 PM IST

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किन राज्यों में होगा SIR?

चुनाव आयोग ने जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR कराने की तैयारी की है, उनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं. इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (Chief Electoral Officers) को आयोग की ओर से औपचारिक पत्र भेजकर तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं. आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के पैन-इंडिया SIR का आदेश पिछले वर्ष जून में जारी किया गया था.

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बिहार-असम में SIR प्रक्रिया पूरी

बिहार में SIR एक्सरसाइज पूरी हो चुकी है, जबकि नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में प्रक्रिया अभी जारी है. असम में SIR की जगह ‘स्पेशल रिवीजन’ 10 फरवरी को पूरा किया गया. इस तरह आयोग देशभर में मतदाता सूची को एक बार फिर व्यापक रूप से अपडेट करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) क्या है?

SIR मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार करने की एक व्यापक प्रक्रिया है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वोटर लिस्ट में केवल पात्र और वास्तविक मतदाताओं के नाम ही दर्ज हों. 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए मतदाताओं का नाम सूची में जोड़ा जाता है. वहीं जिन लोगों का निधन हो चुका है या जो किसी अन्य स्थान पर स्थायी रूप से शिफ्ट हो गए हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं या स्थानांतरित किए जाते हैं. चुनाव आयोग ने 1951 से 2004 के बीच लगभग आठ बार SIR कराया है. आखिरी बार यह प्रक्रिया 2002 से 2004 के बीच संपन्न हुई थी. दिल्ली में 2008 में और उत्तराखंड में 2006 में भी व्यापक स्तर पर रिवीजन किया गया था. अब करीब दो दशक बाद फिर से राष्ट्रीय स्तर पर SIR कराया जा रहा है.

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SIR का उद्देश्य और फायदे

इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाना है. आयोग का कहना है कि इससे फर्जी वोटर्स, डुप्लीकेट नाम और अन्य गड़बड़ियों को हटाने में मदद मिलेगी. अवैध प्रवासियों की पहचान भी इस प्रक्रिया के दौरान की जा सकेगी. खासकर सीमावर्ती राज्यों में अवैध प्रवास के मुद्दे को देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है. SIR की अंतिम सूची एक ‘कट-ऑफ’ दस्तावेज की तरह काम करेगी, जैसे बिहार में 2003 की वोटर लिस्ट का इस्तेमाल संदर्भ के रूप में किया गया था. इससे भविष्य में चुनावों के दौरान पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी. चुनाव आयोग का मानना है कि साफ और सटीक मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद को मजबूत करती है.

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SIR प्रक्रिया कैसे होती है?

SIR के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं. वे यह जांचते हैं कि सूची में दर्ज व्यक्ति वास्तव में उस पते पर निवास करता है या नहीं. यदि किसी मतदाता की मृत्यु हो चुकी है, तो उसका नाम हटाया जाता है. इसी तरह, यदि कोई व्यक्ति स्थान बदल चुका है, तो उसका नाम पुराने पते से हटाकर नए पते पर जोड़ा जा सकता है. इस दौरान नाम, उम्र, पता या फोटो में गड़बड़ी होने पर उसे ठीक करने का भी मौका मिलता है. यदि किसी मतदाता की फोटो धुंधली या पुरानी हो चुकी है, तो वह नई फोटो जमा कर अपडेट करवा सकता है. परिवार में यदि कोई सदस्य 18 वर्ष का हो चुका है, तो उसका नाम भी जोड़ा जा सकता है.

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किन दस्तावेजों की जरूरत होगी?

SIR के दौरान पहचान और निवास प्रमाण के लिए कुछ दस्तावेज दिखाने होंगे. इनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बिजली-पानी या गैस का बिल, बैंक पासबुक, मनरेगा जॉब कार्ड और 2002 की वोटर लिस्ट की प्रति शामिल हैं. इन दस्तावेजों के माध्यम से व्यक्ति की पहचान और स्थायी पते की पुष्टि की जाती है.

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किन्हें दस्तावेज नहीं दिखाने होंगे?

जिन लोगों का नाम 2002 की वोटर लिस्ट में पहले से दर्ज है, उन्हें केवल फॉर्म के साथ उस सूची का प्रिंटआउट जमा करना होगा. उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होगी. यदि किसी व्यक्ति का नाम 2002 की सूची में नहीं है, लेकिन उसके माता-पिता का नाम उसमें दर्ज है, तो उसे पहचान पत्र के साथ माता-पिता के नाम का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा.

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क्या दस्तावेज न दिखाने पर नाम कट जाएगा?

सिर्फ दस्तावेज न दिखाने के आधार पर किसी मतदाता का नाम स्वतः नहीं हटाया जाएगा. BLO संबंधित व्यक्ति से संपर्क करेगा और पहचान तथा निवास की पुष्टि करने की कोशिश करेगा. यदि पुष्टि नहीं हो पाती है, तभी नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और प्रत्येक मतदाता को अपना पक्ष रखने तथा दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा.