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Mahashivratri 2026 : 300 साल बाद महाशिवरात्रि पर बनने जा रहे 4 राजयोग, जानिए तिथि, चार पहर पूजा का शुभ मुहूर्त, मंत्र, आरती, उपाय और सबकुछ

Mahashivratri 2026 : महाशिवरात्रि का पर्व इस बार सबसे खास माना जा रहा है. क्योंकि, इस बार इस शुभ दिन पर सर्वार्थसिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस योग में की गई भगवान शिव की उपासना अत्यंत फलकारी सिद्ध होती है. जीवन की सारी बाधाएं दूर हो जाती है. इस दिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को चार पहर में शिव की अराधना की जाती है. शिव भक्त इस दिन व्रत का संकल्प लेकर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित करते हैं. चारों पहर की पूजा अलग-अलग मुहूर्त में की जाती है. जिससे पूजा का फल और भी ज्यादा मिलता है. शिवरात्रि पर शिव मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और शिव आरती का पाठ करना शुभ  माना जाता है. ऐसा करने से सुख और समृद्धिकी भी प्राप्ती होती है. 


By: Preeti Rajput | Last Updated: February 15, 2026 9:37:27 AM IST

महाशिवरात्रि पर बन रहा है लक्ष्मी नारायण राजयोग. - Photo Gallery
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माहाशिवरात्रि का शुभ दिन

द्रिक पंचांग के मुताबिक, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पड़ रही है. चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट सो होने वाली है. वहीं इसका समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा. निशिता काल और प्रदोष काल को देखते हुए यह पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा.

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महाशिवरात्रि 2026 शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त - 5:21 बजे से 6:12 बजे
अभिजीत मुहूर्त - 12:15 बजे से 12:59 बजे
निशिता काल - रात 12:11 बजे से 1:02 बजे तक
प्रदोष काल - शाम 6:00 बजे से 8:38 बजे तक

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चार पहर का पूजन मुहूर्त

प्रथम प्रहर - शाम 6:11 से रात 9:23 तक
द्वितीय प्रहर - रात 9:23 से 12:36 तक
तृतीय प्रहर - रात 12:36 से सुबह 3:47 तक
चतुर्थ प्रहर - सुबह 3:47 से 6:59 तक

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महाशिवरात्रि पूजा विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें.
पूजा स्थान पर दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें.
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें.
मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएं.
"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें.
शाम के समय प्रदोष काल में विशेष पूजा करें.
महाशिवरात्रि व्रत कथा सुनें और अंत में आरती करें.

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शंख से जल चढ़ाना चाहिए या नहीं

शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए. पौराणिक कथा के मुताबिक, शिवजी ने एक बार शंखचूड़ नामक राक्षस का वध किया था. शंख उसी राक्षस की हड्डियों से बनता है. इसी कारण शंख का इस्तेमाल न करें.

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किस पात्र पर शिवलिंग पर चढ़ाएं जल ?

शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए तांबे के पात्र शुभ माना जाता है. लोहे या अन्य धातुओं से बने बर्तनों से जल नहीं अर्पित करना चाहिए. तांबा पवित्रता का प्रतीक माना जाता है.

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खड़े होकर जल अर्पित कर सकते हैं?

शिवलिंग पर कभी भी खड़े होकर जल अर्पण नहीं करना चाहिए. शिव पुराण के अनुसार हमेशा बैठकर और मंत्रोच्चार करते वक्त ही जल अर्पित करना चाहिए. खड़े होकर जल चढ़ाना शुभ नहीं माना जाता है.