Mahashivratri 2026 Nishita Kaal: 15 फरवरी की आधी रात, महाशिवरात्रि पर 51 मिनट में पूरी होगी हर मनोकामना; जानें निशिता काल का समय
Mahashivratri 2026 | Mahashivratri Nishita Kaal | Shivratri Night puja: इस साल महाशिवरात्रि क पर्व 15 फरवरी को धूमधाम से मनाया जाने वाले हैं. यह त्योहार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. यह दिन भगवान शिव को समर्पित होती है. इस शुभ रात को भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन को शिवभक्त बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. यह सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि संयम और आत्मशुद्धि एक महत्वपूर्ण अवसर है.
ये महाशिवरात्रि क्यों है इतनी खास?
ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार कुछ योगों का संयोग बनने जा रहा है. यह पूजा-पाठ के लिए काफी ज्यादा प्रभावशाली बन सकता है. माना जा रहा है कि इस दिन उपासना करने से मन को शांति, सुख और आर्थिक स्थिरता प्राप्त हो सकती है.
दांपत्य जीवन के लिए शुभ
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन से महादेव ने अपने गृहस्थ जीवन की शुरुआत की थी, इसलिए यह दिन दांपत्य जीवन के लिए भी शुभ माना जाता है.
निशिता काल का महत्व
15 फरवरी की रात लगभग 12:09 मिनट से लेकर 1:01 मिनट तक का समय पूजा के लिए उत्तम माना जाता है. इस दौरान शिवलिंग पर अभिषेक और मंत्र जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि आधी रात का समय शिव साधना के लिए सबसे पवित्र होता है.
चार प्रहर की पूजा
महाशिवरात्रि का रातभर जागकर चार प्रहर में पूजा करने की परंपरा है.
पहला प्रहर (6:11 PM-9:23 PM)
दूसरा प्रहर (9:23 मिनट से 16 फरवरी का रात 12:23)
तीसरा प्रहर (12:35 AM से 3:47 AM)
चौथा प्रहर (3:47 AM से 6:59 AM)
किन लोगों के लिए खास?
जिन लोगों को मानसिक तनाव रहता है, या जिनकी कुंडली में चंद्रमा से जुड़े दोष बताए जाते हैं, जिनके लिए शिव पूजा विशेष लाभकारी मानी जाती है. इस दिन शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान लोग शिव पूजा कर राहत पा सकते हैं. क्योंकि शिव को महाकाल माना जाता है.
महाशिवरात्रि की पूजा विधि
महाशिवरात्रि पर सुबह सबसे स्नान कर व्रत शुरु करें, फिर दिन भर फलाहार या उपवास रखें. रात के समय शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और शहद से अभिषेक करें. इस दिन आप 'ऊं नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें. विवाहित महिलाएं माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करें.
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