कौन हैं सैयदा फलक? कराटे चैंपियन से लेकर AIMIM नेता बनने तक का सफर; BMC चुनाव में अपने भाषणों से आईं सुर्खियों में
Syeda Falak AIMIM Leader: महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के राजनीतिक माहौल के बीच एक नया नाम सैयदा फलक राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. हैदराबाद की 31 साल की यह महिला अपने जोशीले भाषणों और बेबाक अंदाज से न सिर्फ AIMIM समर्थकों में जोश भर रही है, बल्कि अपने विरोधियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है.
कौन हैं सैयदा फलक? (Who is Syeda Falak?)
सैयदा फलक सिर्फ एक राजनेता नहीं हैं. वह एक पेशेवर वकील और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कराटे चैंपियन भी हैं. 'फलक द फाइटर' के नाम से मशहूर, उन्होंने खेल की दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है.
तेलंगाना की महिला एथलीट हैं सैयदा फलक (Syeda Falak is a female athlete from Telangana)
सैयदा फलक तेलंगाना की पहली महिला एथलीट हैं. जिन्होंने वर्ल्ड कराटे चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैयदा ने 20 से ज्यादा राष्ट्रीय और 22 अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीते हैं.
कॉमनवेल्थ कराटे चैंपियनशिप में भारत का कर चुकी हैं प्रतिनिधित्व (syeda falak has represented India at Commonwealth Karate Championships)
कॉमनवेल्थ कराटे चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सैयदा राजनीतिक मैदान में भी उतनी ही आक्रामक हैं जितनी वह रिंग में थीं. खेलों से मिले अनुशासन और लड़ने की भावना उनकी राजनीतिक ताकत बन गई है.
AIMIM पार्टी में कब हुईं शामिल? (When did syeda falak join the AIMIM party?)
सैयदा फलक 2020 में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM पार्टी में शामिल हुईं. पार्टी में शामिल होने के बाद वह जल्द ही ओवैसी के बाद सबसे प्रभावशाली वक्ताओं में से एक बनकर उभरीं.
मुंबई नगर निगम में चुनाव प्रचार की मिली जिम्मेदारी ( syeda falak responsibility of managing election campaign in Mumbai Municipal Corporation)
मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों से पहले सैयदा फलक को महाराष्ट्र के कई मुस्लिम बहुल इलाकों में चुनाव प्रचार की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. उनकी रैलियों में उमड़ रही हज़ारों की भीड़ ने सत्ताधारी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है.
कराटे अकादमी चलाती हैं सैयदा फलक (Syeda Falak runs a karate academy)
राजनीति और खेलों के अलावा सैयदा एक वकील के तौर पर भी सक्रिय हैं. वह एक कराटे अकादमी चलाती हैं जहां वह लड़कियों को आत्मरक्षा की तकनीक सिखाती हैं. उनका मानना है कि महिलाओं को न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक और बौद्धिक रूप से भी मजबूत होना चाहिए ताकि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें.