Hanuman jayanti: हनुमान जी को भगवान श्रीराम का परम भक्त माना जाता है, लेकिन कई धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं में उन्हें श्रीराम के समान ही भाई का दर्जा भी दिया गया है. वीरता और भक्ति के प्रतीक हनुमान जी की जन्मकथा रहस्यों और अद्भुत घटनाओं से भरी हुई है.
अप्सरा से अंजना बनने की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी माता अंजना और वानरराज केसरी के पुत्र थे. फिर भी, कुछ ग्रंथों—विशेषकर आनंद रामायण-में उनकी उत्पत्ति को श्रीराम से गहरे संबंध में जोड़ा गया है. यही कारण है कि उन्हें केवल भक्त नहीं, बल्कि भाई के रूप में भी देखा जाता है.कथा के अनुसार, स्वर्ग की अप्सरा पुंजिकस्थला को एक ऋषि के शाप के कारण वानर रूप में जन्म लेना पड़ा और वह अंजना बनीं. विवाह के बाद जब उन्हें संतान नहीं हुई, तो उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की.
संतान प्राप्ति के लिए तपस्या और शिव का वरदान
इसी समय अयोध्या में राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करवा रहे थे. यज्ञ के फलस्वरूप उन्हें दिव्य खीर प्राप्त हुई, जिसे उन्होंने अपनी रानियों में बांट दिया. मान्यता है कि इसी खीर का एक अंश पक्षी के माध्यम से अंजना तक पहुंचा, जिसे उन्होंने भगवान शिव के आदेश से ग्रहण किया. उसी दिव्य प्रसाद से हनुमान जी का जन्म हुआ. कुछ कथाओं में यह भी बताया जाता है कि वायुदेव ने स्वयं इस खीर का अंश अंजना तक पहुंचाया था, जिससे हनुमान जी को पवनपुत्र भी कहा जाता है.
दशरथ के यज्ञ की खीर और हनुमान जन्म का रहस्य
इस कथा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि हनुमान जी का जन्म उसी दिव्य खीर से जुड़ा है, जिससे श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ था. विशेष रूप से, कैकेयी के हिस्से की खीर से जुड़े प्रसंग के कारण हनुमान जी को भरत के समान भाई माना जाता है. स्वयं श्रीराम ने भी हनुमान जी के प्रति अपने स्नेह को व्यक्त करते हुए कहा था-“तुम मुझे भरत के समान प्रिय हो.” यही कारण है कि भक्ति परंपरा में हनुमान जी को केवल सेवक नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य और आत्मीय भाई के रूप में भी स्थान मिला है.
क्यों माने जाते हैं श्रीराम के भाई
लोक परंपराओं में भी इसका प्रभाव दिखाई देता है. कई जगहों पर रामदरबार की कल्पना में हनुमान जी को राम और उनके भाइयों के साथ शामिल किया जाता है. गोवर्धन पूजा के अवसर पर भी कुछ क्षेत्रों में पांच भाइयों की प्रतिमा बनाई जाती है, जिनमें हनुमान जी को भी स्थान दिया जाता है. इस प्रकार, हनुमान जी की भक्ति केवल सेवा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि भाईचारे के भाव से जुड़कर उन्हें रामकथा का सबसे निकट और आत्मीय पात्र बना देती है.
Published by Ranjana Sharma
April 2, 2026 03:01:54 PM IST

