Holi 2026: लोग होली में काला कपड़ा पहनने से क्यों कतराते हैं, जानें वजह?
Holi 2026: होली का त्योहार खुशियों और जीवन में नई उमंग भरने वाला माना जाता है. इस दिन रंगों के माध्यम से आपसी प्रेम, भाईचारा और सकारात्मक ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काले रंग का उपयोग इस दिन टाला जाता है, क्योंकि यs नकारात्मक ऊर्जा और गंभीरता को बढ़ाता है, जो होली की मस्ती और उत्साह के विपरीत है.
ज्योतिषीय दृष्टि से काले रंग का प्रभाव
काला रंग शनि देव से जुड़ा होता है, जो अनुशासन और गंभीरता सिखाते हैं. होली जैसे उत्सव में इसे पहनने से व्यक्ति के स्वभाव में भारीपन, चिड़चिड़ापन और मानसिक दबाव आने की संभावना बढ़ जाती है.
नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करना
काला रंग अपने अंदर नकारात्मक ऊर्जा को समेटने की क्षमता रखता है. होली के दिन इसे पहनने से मन की सहजता और खुशियों की भावना प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्सव का आनंद कम हो सकता है.
शुभ रंगों का महत्व
धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से हल्के और चमकदार रंग जैसे सफेद, पीला, गुलाबी या हरा पहनना शुभ माना जाता है. ये रंग सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं और ग्रहों के बुरे प्रभाव से सुरक्षा करते हैं.
धार्मिक परंपरा और बुजुर्गों की सीख
शास्त्रों में बताया गया है कि शुभ अवसर पर काले रंग का प्रयोग न करें. बड़े-बुजुर्ग हमेशा त्योहार पर साफ-सुथरे और चमकदार रंग पहनने की सलाह देते हैं ताकि घर में सुख-शांति बनी रहे.
होली की मर्यादा और पावनता
होली भगवान विष्णु की कृपा और भक्त प्रह्लाद की जीत का प्रतीक है. काले कपड़े पहनने से पूजा-पाठ और उत्सव में श्रद्धा और सकारात्मकता कम हो सकती है. इसलिए धर्म और परंपरा की रक्षा के लिए काले रंग से बचना जरूरी है.
रंगों का मन और जीवन पर प्रभाव
रंग सीधे हमारे विचारों, भावनाओं और निर्णयों को प्रभावित करते हैं. काला रंग गंभीरता, अकेलेपन और उदासी का प्रतीक है, जो होली की मस्ती और सबके साथ घुलने-मिलने के माहौल के अनुकूल नहीं है.
सुरक्षा और सहजता के लिए सही रंग
उचित रंग पहनने से त्योहार का आनंद बिना किसी चिंता के लिया जा सकता है. ये मन में खुशी, उत्साह और नई शुरुआत की भावना पैदा करता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सामंजस्य बढ़ता है.