South Indian Film: एक फिल्म, 45 किरदार! कमल हासन नहीं, इस एक्टर ने एक ही फिल्म में दिखाए अलग-अलग चेहरे; जानें कौन है वो ?
Johnson George: साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री ने हमेशा अपनी अनोखी कहानियों और ज़बरदस्त एक्टिंग से दर्शकों को चौंकाया है. इसी कड़ी में, आइए एक मलयालम फ़िल्म पर नज़र डालते हैं, जिसमें एक एक्टर ने दो या तीन नहीं, बल्कि 45 अलग-अलग किरदार निभाए. यह एक्टर न तो रजनीकांत हैं, न कमल हासन और न ही गोविंदा. क्या आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये कलाकार कौन है? हालाँकि, सबसे पहले कमल हासन का नाम ज़हन में आता है, जिन्होंने ‘देवस्थानम’ में 10 किरदार निभाकर लोगों को चौंका दिया था, लेकिन अब यह रिकॉर्ड भी टूट चुका है और जॉनसन जॉर्ज के नाम हो गया है.
जॉनसन जॉर्ज ने निभाए 45 किरदार
जॉनसन ने मलयालम फ़िल्म 'आरानु नजान' में एक साथ 45 किरदार निभाकर इतिहास रच दिया. बता दें कि ये फ़िल्म साल 2018 में रिलीज़ हुई थी और भले ही यह बॉक्स ऑफ़िस पर सफल नहीं रही, लेकिन अपनी अनोखी प्रस्तुति के कारण यह चर्चा में बनी रही.
प्रभावशाली किरदारों का निभाया रोल
बता दें कि इस फ़िल्म का निर्देशन पी.आर. उन्नीकृष्णन ने किया था. 'आरानु नजान' का नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है और यह फ़िल्म इसलिए भी खास है क्योंकि जॉनसन ने इसमें महात्मा गांधी, ईसा मसीह, स्वामी विवेकानंद और लियोनार्डो दा विंची जैसे कई ऐतिहासिक और प्रभावशाली किरदारों को परदे पर उतारा है.
इस फिल्म में इन किरदारों की अहम भूमिका
इस फ़िल्म में उनके साथ जयचंद्रन थगजिकरन और मुहम्मद नीलांबुर भी नज़र आते हैं; यह फ़िल्म लगभग 1 घंटा 47 मिनट लंबी है.
जॉनसन ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
जॉनसन जॉर्ज की इस उपलब्धि को आज तक कोई भी तोड़ नहीं पाया है. अगर आप कुछ अलग और अद्भुत देखना चाहते हैं, तो 'आरानु नजान' आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव साबित हो सकती है.
एक साथ निभाए 45 किरदार
मलयालम फ़िल्म 'आरानु नजान' एक अनोखी और हैरान कर देने वाली ड्रामा फ़िल्म है, जिसकी कहानी आत्म-खोज और अस्तित्व से जुड़े सवालों के इर्द-गिर्द बुनी गई है. इस फ़िल्म में, अभिनेता जॉनसन जॉर्ज ने एक साथ 45 अलग-अलग किरदार निभाकर अपना नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करवाया है.
कहानी कैसी है?
फ़िल्म की मुख्य कहानी एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है जिसे 'ग्लोब मैन' के नाम से जाना जाता है. यह किरदार पूरी दुनिया की यात्रा करता है और अपने कंधे पर एक ग्लोब (पृथ्वी का गोला) लेकर चलता है, जो उसकी पहचान और उसके उद्देश्य का प्रतीक है. एक दिन, वो महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने खड़ा होता है और अचानक उसे एहसास होता है कि वो गांधी बन गया है.
फिल्म में दिखे कई महान व्यक्ति
इस अनुभव के बाद, उसे यह समझ आता है कि वो विभिन्न ऐतिहासिक और सांस्कृतिक हस्तियों का रूप धारण कर सकता है. फ़िल्म में, वो महात्मा गांधी, ईसा मसीह, स्वामी विवेकानंद और लियोनार्डो दा विंची जैसे 45 अलग-अलग किरदारों में बदल जाता है. हर किरदार के माध्यम से, यह फ़िल्म यह सवाल उठाती है कि 'मैं कौन हूँ?' और 'मेरी असली पहचान क्या है?'