Sugar Health Risks: चीनी के है शौकीन तो हो जाए अलर्ट, ले डूबेगी शुगर, हो जाएगी ये बीमारी
Sugar Health Risks: अक्सर शुगर को सिर्फ डायबिटीज से जोड़कर देखा जाता है, जबकि हकीकत यह है कि ज्यादा चीनी शरीर के कई अहम अंगों को प्रभावित करती है. दिल, लिवर, दिमाग, किडनी और मानसिक सेहत पर इसका असर चुपचाप बढ़ता है, जो समय के साथ गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है.
शुगर सिर्फ डायबिटीज तक सीमित नहीं
अक्सर चीनी की चर्चा डायबिटीज के संदर्भ में होती है, लेकिन इसका असर शरीर के कई अंगों तक पहुंचता है. ज्यादा शुगर दिल, लिवर, दिमाग और मानसिक सेहत को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है.
डायबिटीज का खतरा क्यों बढ़ाती है शुगर
शुगर डायबिटीज की एकमात्र वजह नहीं है, लेकिन ये जोखिम को काफी बढ़ा देती है. मीठे पेय और प्रोसेस्ड फूड ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है. लंबे समय तक शुगर कंट्रोल न रहे तो आंखों, किडनी, नसों और दिल पर बुरा असर पड़ सकता है.
कैंसर से अप्रत्यक्ष संबंध
चीनी सीधे कैंसर की वजह नहीं बनती, लेकिन ज्यादा शुगर मोटापा और शरीर में सूजन बढ़ाती है. ये दोनों ही कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले अहम कारण माने जाते हैं. कई अध्ययनों में अधिक शुगर लेने वालों में कैंसर का खतरा ज्यादा पाया गया है.
दिल की सेहत पर असर
अधिक शुगर लेने से खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ते हैं, जबकि अच्छा कोलेस्ट्रॉल घटने लगता है. इससे नसों में फैट जमता है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह बन सकता है.
लिवर में फैट जमा होने का खतरा
ज्यादा शुगर का एक हिस्सा लिवर में फैट के रूप में जमा हो जाता है. इससे फैटी लिवर की समस्या हो सकती है. समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह सूजन और लिवर को गंभीर नुकसान तक पहुंचा सकता है.
वजन बढ़ने की छुपी वजह
मीठी चीजें ज्यादा कैलोरी देती हैं लेकिन देर तक पेट भरा नहीं रखतीं. इससे बार-बार भूख लगती है और जरूरत से ज्यादा खाना हो जाता है. नतीजा धीरे-धीरे बढ़ता वजन और बिगड़ती मेटाबॉलिक सेहत होती है.
मानसिक सेहत पर प्रभाव
ब्लड शुगर का अचानक बढ़ना और गिरना मूड को प्रभावित करता है. इससे चिड़चिड़ापन, थकान और डिप्रेशन की समस्या बढ़ सकती है. शोध बताते हैं कि ज्यादा चीनी लेने वालों में डिप्रेशन का खतरा अधिक होता है.
दिमाग और याददाश्त पर असर
अधिक शुगर से दिमाग में सूजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है. इसका असर याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ता है. लंबे समय तक यह स्थिति डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है.