क्लीन-शेव हमेशा शार्प क्यों नहीं होता, धुरंधर ने किया साबित
Why clean-shaven is not always sharp, Dhurandhar proved: क्लीन-शेव होना शार्प होने की गारंटी नहीं है. हाल ही में आई फिल्म धुरंधर ने यह साबति कर दिया कि असली तेज़ी अनुभव, आत्मविश्वास, हालात की समझ और सही फैसलों से आती है. इसके साथ ही इंसान की पहचान उसके लुक से नहीं, बल्कि उसके काम, सोच और नतीजों से ही होती है. असली शार्पनेस दिमाग में होती है, चेहरे पर नहीं.
लुक बनाम काबिलियत
क्लीन-शेव दिखने में प्रोफेशनल लगता है, लेकिन सिर्फ लुक से इंसान समझदार या तेज़ नहीं बनता है. फिल्म धुरंधर ने यह साबित किया, काम इंसान की पहचान होती है न कि चेहरा.
अनुभव की धारं
तो वहीं, असली शार्पनेस सालों के अनुभव से आती है. इंसानों के फैसलों में उसकी सीख और गलतियों का असर दिखता है, न कि उसकी शेव में.
कॉन्फिडेंस की भूमिका
आत्मविश्वास दाढ़ी या क्लीन-शेव पर पूरी तरह से निर्भर नहीं करती है. इंसान का कॉन्फिडेंस उसकी बॉडी लैंग्वेज और बातों से झलकने लगता है.
परिस्थिति की समझ
इसके साथ ही स्मार्ट इंसान वहीं है जो हालात को देखते हुए भी अपना काम कर रहा है. हमें हर सिचुएशन में सही मूव चलना आना चाहिए.
निर्णय की सटीकता
तो वहीं, दूसरी तरफ शार्प आदमी की पहचान उसके फैसलों से होती है. कोई भी फैसला हमेशा सोच-समझकर ही किए जाने चाहिए.
निरंतर सीख Continuous Learning
इतना ही नहीं, जो सीखना बंद कर देता है, उसकी धार कुंद हो जाती है. धुरंधर हमेशा सीखता रहता है, इसलिए आगे रहता है.
परिणाम बोलते हैं
लेकिन, आखिर में लोग लुक नहीं, रिज़ल्ट देखते हैं और फिल्म धुरंधर के नतीजे इस बात को साबित करता है आपका काम ही आपका पहचान है.