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18 में शादी, 26 में विधवा और 40 में बेटे को कंधा.. पहली पढ़ी-लिखी एक्ट्रेस की रुला देने वाली कहानी

Durga Khote: हिंदी और मराठी सिनेमा के शुरुआती दिनों में महिलाओं के लिए फिल्मों में काम करना आसान नहीं था. उस समय ज़्यादातर कलाकार एक ही स्टूडियो या प्रोडक्शन हाउस के साथ लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट से बंधे होते थे. कई कंपनियों के लिए आज़ाद होकर काम करना किसी भी कलाकार के लिए मुश्किल और जोखिम भरा माना जाता था.


By: Hasnain Alam | Published: January 14, 2026 2:02:30 PM IST

How did she become a freelance actress - Photo Gallery
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फ्रीलांस एक्ट्रेस कैसे बनी? (How did she become a freelance actress?)

दुर्गा खोटे ने इस चलन को तोड़ा और भारतीय सिनेमा की पहली फ्रीलांस एक्ट्रेस बनी है. यह साबित करते हुए कि महिला कलाकार भी अपना रास्ता खुद बना सकती है. उनके इस कदम ने न सिर्फ उन्हें एक खास पहचान दी है. बल्कि आने वाली पीढ़ियों की महिलाओं के लिए भी रास्ता बनाया है.

When was she born - Photo Gallery
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कब जन्म ली? (When was she born?)

दुर्गा खोटे का जन्म 14 जनवरी 1905 को मुंबई में हुआ था. बचपन में वह पढ़ाई में बहुत होशियार थीं और उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया है. उस समय लड़कियों के लिए शिक्षा पाना आसान नहीं था, लेकिन दुर्गा की शिक्षा ने उनके भविष्य की नींव रखी है.

When did the wedding take place - Photo Gallery
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कब हुई थी शादी? (When did the wedding take place?)

18 साल की उम्र में दुर्गा ने एक पढ़े-लिखे नौजवान विश्वनाथ खोटे से शादी की. शादी के बाद दुर्गा के दो बेटे हुए. लेकिन उनकी ज़िंदगी में जल्दी ही दुख आ गया. जब वह सिर्फ़ 26 साल की थीं, तब उनके पति का निधन हो गया. अकेले दो बच्चों को पालना दुर्गा के लिए बहुत मुश्किल था. अपने बच्चों का पेट पालने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया था.

He acted in The Deceptive Trap - Photo Gallery
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'फरेबी जाल' में रोल किया (He acted in 'The Deceptive Trap')

इसी दौरान उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला है. अपनी बहन के जरिए, दुर्गा खोटे को फिल्म 'फरेबी जाल' में एक छोटा सा रोल मिला. उस समय समाज में महिलाओं के लिए फिल्मों में काम करना सही नहीं माना जाता था, लेकिन दुर्गा ने अपने बच्चों के लिए और आत्मनिर्भर बनने के लिए यह कदम उठाया. उनकी कड़ी मेहनत और टैलेंट ने बाद में उन्हें कई नए रोल दिलाए है.

How did their luck change - Photo Gallery
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कैसे बदली किस्मत? (How did their luck change?)

फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद दुर्गा खोटे ने एक बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने स्टूडियो कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को ठुकरा दिया और कई कंपनियों के लिए काम करना शुरू किया है. प्रभात फिल्म कंपनी के साथ काम करते हुए उन्होंने न्यू थिएटर्स, ईस्ट इंडिया फिल्म कंपनी और प्रकाश पिक्चर्स जैसी कंपनियों के लिए भी काम किया है. इसीलिए उन्हें भारतीय सिनेमा की पहली फ्रीलांस महिला कलाकार माना जाता है. इस फैसले ने न सिर्फ उन्हें आज़ाद बनाया है. बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति को भी बदल दिया है.

How many films have you made - Photo Gallery
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कितनी फिल्में की? (How many films have you made?)

उनका करियर लगभग 50 साल तक चला, जिसमें उन्होंने हिंदी और मराठी में 200 से ज़्यादा फिल्मों में काम किया है. उनके यादगार रोल में 'मुगल-ए-आज़म' में जोधा बाई, 'मिर्ज़ा ग़ालिब' में मां, 'बॉबी' में दादी और 'भारत मिलाप' जैसी कई हिट फिल्मों के रोल शामिल है. वह सिर्फ़ एक्टिंग तक ही सीमित नहीं थी. उन्होंने 1937 में फ़िल्म 'साथी' को प्रोड्यूस और डायरेक्ट भी किया, जो उस समय किसी महिला के लिए एक दुर्लभ उपलब्धि थी.

When did you receive the award - Photo Gallery
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अवॉर्ड कब मिली? (When did you receive the award?)

दुर्गा खोटे को कई अवॉर्ड और सम्मान मिले है. उन्होंने 1942 और 1943 में बंगाल फ़िल्म जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (BFJA) से बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड जीता है. उन्हें 1958 में संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, 1968 में पद्म श्री और 1983 में दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. खास बात यह है कि दुर्गा खोटे दादासाहेब फालके अवॉर्ड जीतने वाली चौथी महिला थीं.

I have also worked in production - Photo Gallery
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प्रोड्यूस में भी काम किया है (I have also worked in production)

जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ी, दुर्गा खोटे ने मां और दादी के रोल करने शुरू कर दिए. उन्होंने शॉर्ट फ़िल्में, डॉक्यूमेंट्री और टेलीविजन सीरियल भी प्रोड्यूस किए है. उन्होंने लोकप्रिय दूरदर्शन शो 'वागले की दुनिया' प्रोड्यूस किया है. दुर्गा खोटे का निधन 22 सितंबर, 1991 को हुआ है.