Barsana Lathmar Holi: बरसाने की लठमार होली में कौन बनती है हुरियारन? जानें परंपरा और खास नियम
Barsana Lathmar Holi: बरसाना की लठमार होली देश की सबसे अनोखी और चर्चित होली मानी जाती है. इस परंपरा का संबंध राधा और कृष्ण की लीलाओं से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि कृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाना आकर राधा और उनकी सखियों के साथ होली खेलते थे, तब महिलाएं उन्हें लाठियों से मजाकिया अंदाज में खदेड़ती थीं.
बरसाने की लठमार होली क्यों है खास?
बरसाना की लठमार होली देश-विदेश में मशहूर है. यहां होली सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि लाठियों और परंपराओं के साथ खेली जाती है.
क्या है लठमार होली की परंपरा?
मान्यता है कि राधा के गांव बरसाना में कृष्ण अपने सखाओं के साथ होली खेलने आते थे. तब गांव की महिलाएं उन्हें लाठियों से मजाकिया अंदाज में खदेड़ती थीं.
कौन होती हैं हुरियारन?
बरसाने की वे महिलाएं जो लठमार होली में लाठी लेकर नंदगांव के हुरियारों पर प्रहार करती हैं, उन्हें हुरियारन कहा जाता है. ये स्थानीय परिवारों की महिलाएं होती हैं.
कैसे चुनी जाती हैं हुरियारन?
हुरियारन बनने के लिए किसी औपचारिक प्रतियोगिता की जरूरत नहीं होती. यह सम्मान परंपरा, परिवार और स्थानीय भागीदारी के आधार पर मिलता है.
नंदगांव से आते हैं हुरियारे
नंदगांव के पुरुष हुरियारे बनकर बरसाना पहुंचते हैं. वे ढाल लेकर आते हैं ताकि हुरियारन की लाठियों से खुद को बचा सकें.
कहां खेली जाती है लठमार होली?
यह अनोखी होली बरसाना के प्रसिद्ध राधा रानी मंदिर के पास खेली जाती है. यहां हजारों श्रद्धालु इस परंपरा को देखने आते हैं.
क्या हैं इस होली के नियम?
लाठियां प्रतीकात्मक होती हैं और पूरे आयोजन की निगरानी स्थानीय प्रशासन करता है. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं ताकि परंपरा उत्सव में बदले, विवाद में नहीं.
क्यों बनना चाहती हैं महिलाएं हुरियारन?
हुरियारन बनना सम्मान और गर्व की बात मानी जाती है. यह बरसाना की सांस्कृतिक पहचान है और पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही परंपरा का हिस्सा है.