क्या सच में नवरात्रि के समय मंदिरों में चढ़ाया जाता है मांसाहारी प्रसाद? जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान
भारत में जब भी हम प्रसाद का नाम सुनते हैं तो सबसे पहले हमें किसी शुभ और पवित्र चीज़ का ख़याल आता है, जिसमें ज़्यादातर हम लोग प्रसाद के रूप में फल, लड्डू, मिठाइयाँ ही सोचते हैं या फिर खुद भी वही बनाते हैं। साथ ही हम आपको ये भी बता दें कि ज्यादातर लोगों को ये लगता है कि प्रसाद हमेशा शाकाहारी होता है। लेकिन भारत में ऐसी जगहें भी हैं, जहाँ पर कई ऐसे समुदाय हैं जो प्रसाद के रूप में भगवान को झींगा, मछली, यहाँ तक कि मटन को भी प्रसाद की तरह चढ़ाते हैं। इस मुद्दे पर हाल ही में आदित्य ठाकरे ने सबके सामने सोशल मीडिया पर खुलकर बात की है। उनका कहना था कि कुछ लोग नवरात्र के समय पर भी मांसाहारी भोजन को भगवान के चरणों में अर्पित करते हैं। तो चलिए जानते हैं इस टॉपिक के बारे में।
ओडिशा के कई तटीय इलाकों में देवी-देवताओं को मछली चढ़ाया जाता है
ओडिशा के कई तटीय इलाकों में देवी-देवताओं को मछली का भोग चढ़ाने की परंपरा है। खासकर गाँवों में लोग मानते हैं कि समुद्र और नदियों से मिलने वाली मछली माँ लक्ष्मी और ग्राम देवी को अर्पित करने से सुख-समृद्धि आती है। यहाँ पूजा के बाद वही पकाई गई मछली परिवार और समुदाय के साथ बाँटी जाती है।
गोवा में देवी-देवताओं को झींगा अर्पित किया जाता है
गोवा समुद्री भोजन के लिए मशहूर है और यहाँ कई परिवार देवी-देवताओं को झींगा यानी प्रॉन्स का प्रसाद चढ़ाते हैं। खासकर त्योहारों या विशेष अवसरों पर झींगा को नारियल और मसालों में पकाकर देवी को अर्पित किया जाता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि समुद्र से मिला भोजन माँ का आशीर्वाद है और उसे अर्पित करना देवी के प्रति आभार व्यक्त करने का तरीका है। पूजा के बाद यही भोजन प्रसाद के रूप में सभी को बाँटा जाता है।
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा और काली पूजा के समय मटन का भोग चढ़ाने की पुरानी परंपरा
पश्चिम बंगाल में खासकर दुर्गा पूजा और काली पूजा के समय मटन (बकरी का मांस) का भोग चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है। इसे देवी माँ की शक्ति और बल का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान बकरी की बलि दी जाती है और फिर उसका मटन पकाकर देवी को अर्पित किया जाता है।
असम के मंदिरों में मछली और बकरी का मांस प्रसाद रूप में अर्पित किया जाता है
असम में कामाख्या मंदिर और कई स्थानीय देवियों के मंदिरों में मछली और बकरी का मांस प्रसाद रूप में अर्पित किया जाता है। यहाँ बलि की परंपरा देवी को प्रसन्न करने और गाँव की रक्षा के लिए की जाती है। पूजा में उपयोग की गई मछली या मांस को पकाकर श्रद्धालुओं के बीच बाँटा जाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक भी है क्योंकि पूरे गाँव के लोग एक साथ इस भोजन का हिस्सा बनते हैं।
नॉर्थ-ईस्ट में मांस पकाकर देवताओं को चढ़ाया जाता है
नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में मांसाहारी भोजन आम जीवन का हिस्सा है। नागालैंड में देवी-देवताओं को चिकन अर्पित करने की परंपरा कई जनजातीय समुदायों में देखने को मिलती है। पूजा या त्योहारों के दौरान मुर्गे की बलि दी जाती है और फिर उसका मांस पकाकर देवताओं को चढ़ाया जाता है।
महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों
महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों और कई देवी मंदिरों में आज भी मटन का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है। खासकर ग्राम देवी की पूजा के समय बकरी की बलि दी जाती है और उसका मांस पकाकर देवी को अर्पित किया जाता है।
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