Independence Day 2025: आखिर क्यों 15 अगस्त को ही मिली थी भारत को आज़ादी, जानें इस तारीख का असली इतिहास
Independence Day 2025: 15 अगस्त 1947 यह दिन सिर्फ भारत की आजादी का प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के संघर्ष, बलिदान और सपनों की परिणति है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इसी तारीख को आजादी देने का फैसला क्यों हुआ? इसके पीछे सिर्फ राजनीतिक कारण नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, ब्रिटिश रणनीतियों और व्यक्तिगत मान्यताओं का भी हाथ था, आइए जानतें हैं इसके बारे में…
भारत छोड़ो आंदोलन
भारत की आजादी के पीछे सबसे बड़ा जनआंदोलन 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन था। महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का नारा देकर देशवासियों को अंतिम लड़ाई के लिए प्रेरित किया।
द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव
द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) ने ब्रिटिश साम्राज्य को आर्थिक रूप से बुरी तरह कमजोर कर दिया। युद्ध के लिए संसाधन जुटाने में इंग्लैंड ने भारत से भारी मात्रा में पैसा, अनाज और सैनिक लिए। युद्ध खत्म होने के बाद ब्रिटेन पर इतना कर्ज था कि उसके लिए दूर-दराज़ के उपनिवेशों को बनाए रखना असंभव हो गया। लार्ड माउंटबेटन ने 15 अगस्त 1947 को इसलिए चुना क्योंकि यह द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी सालगिरह थी, जो उनके लिए एक ‘विजय दिवस’ था।
लार्ड माउंटबेटन की व्यक्तिगत पसंद
भारत के आखिरी वायसराय, लार्ड माउंटबेटन ने 15 अगस्त को एक खास कारण से चुना। 15 अगस्त 1945 को जापान ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण किया था, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हुआ था।
ब्रिटेन की राजनीतिक मजबूरियां
1945 के आम चुनाव में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी, जिसने भारत को आजादी देने का वादा किया था। प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली और उनकी सरकार जानते थे कि भारत को रोके रखना अब न तो आर्थिक रूप से संभव है और न ही राजनीतिक रूप से।
विभाजन की जल्दीबाजी
भारत की आजादी के साथ-साथ देश का विभाजन भी होना तय हुआ। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमाएं तय करने के लिए रेडक्लिफ लाइन का निर्माण हो रहा था, लेकिन समय बहुत कम था। माउंटबेटन नहीं चाहते थे कि विभाजन की प्रक्रिया लंबी खिंचे, क्योंकि इससे हिंसा और अराजकता और बढ़ सकती थी।
हिंदू पंचांग और स्वतंत्रता दिवस
दिलचस्प बात यह है कि 15 अगस्त 1947 का दिन हिंदू पंचांग के अनुसार भी शुभ था। यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि थी, जो धार्मिक दृष्टि से मंगलकारी मानी जाती है। हालांकि, यह कारण मुख्य नहीं था, लेकिन भारतीय नेताओं ने इस तारीख को धार्मिक रूप से भी सकारात्मक मान लिया।
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