मुगल बादशाहों की ताकत का असली राज: ये दुर्लभ जड़ी-बूटियां और आयुर्वेदिक नुस्खे, जिनसे मिलती थी घोड़े जैसी ताकत
मुगल बादशाह दिनभर दरबार की गतिविधियों, शिकार और युद्ध में व्यस्त रहने के बावजूद अपनी ऊर्जा कभी कम नहीं होने देते थे। इसके पीछे एक खास राज था—दुर्लभ जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक-यूनानी नुस्खों का सेवन,जिनसे मुगल बादशाह हमेशा ‘घोड़े जैसी ताकत’ बनाए रखते थें आइए जानतें हैं इसके बारे में
अश्वगंधा
अश्वगंधा सदियों से एक शक्तिवर्धक औषधि के रूप में प्रसिद्ध है। मुगल काल में इसे दूध के साथ उबालकर पिया जाता था। बादशाह लंबे युद्धों और दरबारी काम के बाद भी तरोताजा महसूस करने के लिए इसका सेवन करते थे।
शिलाजीत
हिमालय की चट्टानों से निकलने वाला शिलाजीत मुगल बादशाहों का गुप्त हथियार था। इसमें मौजूद फुल्विक एसिड और मिनरल्स शरीर की ताकत, स्टैमिना और पुरुष हार्मोन को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसे शहद या दूध के साथ मिलाकर लिया जाता था।
सफेद मूसली
सफेद मूसली एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जिसे मुगल बादशाह खासतौर पर वैवाहिक जीवन में ताकत बनाए रखने के लिए इस्तेमाल करते थे। यह शरीर में टेस्टोस्टेरोन स्तर बढ़ाती है और कमजोरी दूर करती है। इसे अक्सर दूध में मिलाकर पीया जाता था ताकि असर दोगुना हो जाए।
केसर
केसर मुगल बादशाहों के औषधियों का अहम हिस्सा था। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स रक्त संचार को बेहतर करते हैं, जिससे शरीर में ऊर्जा और ताजगी बनी रहती है।
विदारीकंद
विदारीकंद को मुगल बादशाह खासतौर पर लंबे सफर और युद्ध से पहले लेते थे। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन शक्ति भी सुधारता है। इससे मांसपेशियों में खिंचाव कम होता है और स्टैमिना बढ़ता है।
चिरायता
चिरायता को पाचन सुधारने और शरीर को डिटॉक्स करने के लिए लिया जाता था। यह लेकिन लीवर को मजबूत करता है और खून साफ करता है, जिससे ऊर्जा का स्तर उच्च बना रहता है।
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