kenya Ant Trafficking: 21 हजार में बिक रही रानी चींटी! इस देश में चल रहा करोड़ों का काला कारोबार
kenya Ant Trafficking: कीनिया के गिलगिल में रानी चींटियों की अवैध तस्करी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी भारी मांग है. इन्हें फार्मिकेरियम में पालने के लिए बेचा जाता है. वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि इससे पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को गंभीर खतरा हो सकता है.
गिलगिल: चींटियों का नया ‘हॉटस्पॉट’
कीनिया की रिफ्ट वैली में स्थित छोटा सा कस्बा गिलगिल इन दिनों एक अनोखे लेकिन खतरनाक कारण से चर्चा में है. बारिश के मौसम में यहां हजारों बांबियों से चींटियों के झुंड निकलते हैं, खासकर रानी चींटियां, जिन्हें पकड़कर बेचा जाता है. यही समय तस्करों और स्थानीय लोगों के लिए “मौका” बन जाता है.
रानी चींटियों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग
दुनिया भर में चींटियों को पालने का शौक तेजी से बढ़ रहा है. लोग पारदर्शी बॉक्स यानी “फार्मिकेरियम” में इन्हें रखते हैं और कॉलोनी बनते देखते हैं. खासकर “अफ्रीकन हार्वेस्टर” रानी चींटी की मांग बहुत ज्यादा है, जिसकी कीमत 220 डॉलर (करीब 21 हजार रुपये) तक पहुंच जाती है.
कैसे होता है यह ग़ैरक़ानूनी कारोबार
स्थानीय लोग सुबह-सुबह बांबियां खोजकर रानी चींटियों को पकड़ते हैं और बिचौलियों को बेचते हैं. विदेशी खरीदार खुद मैदान में नहीं आते, बल्कि शहर में रहकर डील करते हैं. चींटियों को छोटी ट्यूब और सिरिंज में भरकर आसानी से सप्लाई किया जाता है.
एयरपोर्ट सुरक्षा की बड़ी चुनौती
रानी चींटियों को पार्सल करना आसान है क्योंकि एयरपोर्ट स्कैनर अक्सर जीवित छोटे जीवों को पहचान नहीं पाते. इसी वजह से इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी कर ले जाना आसान हो गया है, जिससे यह धंधा तेजी से फैल रहा है.
बड़े खुलासे और गिरफ्तारी
पिछले साल नैवाशा के एक गेस्टहाउस में 5,000 से ज्यादा रानी चींटियां पकड़ी गईं. संदिग्ध बेल्जियम, वियतनाम और कीनिया के थे. वे चींटियों को टेस्ट ट्यूब में गीली रूई के साथ रखते थे, जिससे वे दो महीने तक जीवित रह सकती थीं. हाल ही में नैरोबी एयरपोर्ट पर भी चीन भेजी जा रही एक बड़ी खेप पकड़ी गई.
वैज्ञानिकों के लिए भी चौंकाने वाला ट्रेंड
अब तक कीनिया में तस्करी के मामले हाथी दांत और गैंडे के सींग तक सीमित थे, लेकिन चींटियों का अवैध व्यापार वैज्ञानिकों और अधिकारियों दोनों के लिए नया और हैरान करने वाला है.
रानी चींटी की खासियत
“मेसर सेफालोट्स” नाम की यह प्रजाति पूर्वी अफ्रीका में पाई जाती है. रानी चींटी “फाउंड्रेस क्वीन” होती है, जो अकेले पूरी कॉलोनी बना सकती है. यह 25 मिमी तक बड़ी हो सकती है और दशकों तक अंडे देती रहती है. एक कॉलोनी 50 से 70 साल तक जीवित रह सकती है.
पारिस्थितिकी तंत्र पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन चींटियों को बड़ी संख्या में पकड़ा गया तो पूरे इकोसिस्टम पर असर पड़ेगा. ये बीज फैलाने में अहम भूमिका निभाती हैं और घास के मैदानों को जीवित बनाए रखती हैं. रानी के बिना पूरी कॉलोनी खत्म हो जाती है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खतरे की चेतावनी
चीन में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि हजारों कॉलोनियां ऑनलाइन बेची जा रही हैं, जिनमें कई विदेशी प्रजातियां शामिल हैं. वैज्ञानिकों का डर है कि अगर ये चींटियां नए क्षेत्रों में फैल गईं तो खेती और जैव विविधता को भारी नुकसान हो सकता है.
समाधान और भविष्य की बहस
कीनिया सरकार अब इस व्यापार को कानूनी और नियंत्रित बनाने पर विचार कर रही है, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके. हालांकि पर्यावरणविद चाहते हैं कि इसे सख्ती से नियंत्रित किया जाए और अंतरराष्ट्रीय संधियों में शामिल किया जाए. फिलहाल यह बहस जारी है कि चींटियों का यह व्यापार आर्थिक अवसर है या पर्यावरण के लिए खतरा.