Chandauli Tribal Community Protests: चंदौली चकिया, गोंड राजाओं द्वारा स्थापित ऐतिहासिक गोंडवाना राजचिन्ह के संरक्षण की मांग को लेकर गोंड़ व खरवार आदिवासी समाज के लोगों ने चकिया स्थित दिलकुशा वन विश्राम गृह परिसर में एक विशाल रैली निकाली. रैली के दौरान समाज के लोगों ने ‘हाथी पर शेर’ अंकित प्रतीक चिन्ह पर माल्यार्पण कर अपनी आस्था और गौरव का प्रदर्शन किया. रैली में शामिल वक्ताओं ने कहा कि गोंडवाना राजचिन्ह केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के इतिहास, संस्कृति और परंपरा की पहचान है. उन्होंने चिंता व्यक्त की कि समय के साथ इस ऐतिहासिक धरोहर की लगातार उपेक्षा हो रही है, जिससे इसके क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ता जा रहा है.
सड़कों पर उतरा आदिवासी समाज
विजय गोंड़ (अधिवक्ता) ने अपने संबोधन में कहा, – ‘गोंडवाना राजचिन्ह हमारे पूर्वजों की शौर्यगाथा और पहचान का प्रतीक है. यदि समय रहते इसका संरक्षण नहीं किया गया, तो यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए केवल एक कहानी बनकर रह जाएगा. सरकार को इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए इसे संरक्षित करना चाहिए.’
वहीं डॉ. कुंदन गोंड़ (जिला पंचायत सदस्य व आदिवासी नेता) ने कहा, – ‘यह राजचिन्ह आदिवासी समाज की अस्मिता से जुड़ा हुआ है. हम सरकार से मांग करते हैं कि इसे ऐतिहासिक धरोहर घोषित कर इसके संरक्षण, सुरक्षा और सौंदर्यीकरण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि हमारी संस्कृति सुरक्षित रह सके.’
गोंडवाना राजचिन्ह को संरक्षित करने की मांग
आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि गोंडवाना राजचिन्ह को संरक्षित कर उसे आधिकारिक रूप से ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा दिया जाए. साथ ही परिसर में साफ-सफाई, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की भी अपील की गई. रैली शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल रहे. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से जल्द सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद जताई.
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Published by Preeti Rajput
April 20, 2026 04:05:20 PM IST

