Mahakal Bhasma Aarti: “महाकाल की भस्म आरती में पहुंचे थें विराट कोहली और अनुष्का शर्मा, क्या अनुष्का ने देखी थी भस्म आरती ? जानिए आरती के समय महिलाओं के घूंघट करने की प्रथा को
Mahakal Bhasma Aarti: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में रोजाना प्रात: होने वाली भस्म आरती न केवल धार्मिक नजरिए से प्रसिद्ध है बल्कि इस आरती को देखने के लिए रोजाना दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं, मान्यताओं के अनुसार महाकाल की आरती के दौरान महिलाओं को अपना घूंघट करने की प्रथा भी है। यह आरती महादेव के श्रृंगार के तौर पर की जाती है ,इस आरती को देखने के लिए भारतीय टीम स्टार क्रिकेटर विराट कोहली (Virat kohli) और अनुष्का शर्मा भी पहुंचे थे, आईए जानते हैं इसके बारे में…
महाकाल भस्म आरती का महत्व
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह आरती प्रतिदिन प्रात: काल में होती है और चिता की राख से भगवान शिव का पूजन किया जाता था लेकिन इस समय यह आरती में गाय के कड़ें, पीपल, पलाश, शमी और बेर की लकड़ियों का उपयोग किया जाता है।
विराट-अनुष्का
जब विराट कोहली और अनुष्का शर्मा मंदिर में पहुँचे, तो वे आरती के समय पूरी तरह लीन दिखाई दिए। दोनों ने आस्था और श्रद्धा के साथ आरती में भाग लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अनुष्का ने घूंघट की परंपरा का पालन करते हुए आरती देखी।
महिलाओं के लिए घूंघट की प्रथा
महाकाल मंदिर में महिलाओं को भस्म आरती के दौरान सीधे दर्शन करने की अनुमति नहीं होती। इसके पीछे मान्यता है कि मान्यता है कि इस दैरान भगवान शिव निराकार स्वरूप में होते हैं, जिसे सीधे देखना महिलाओं के लिए निषिद्ध माना गया। इसलिए महिलाएं घूंघट या पर्दे के पीछे रहकर आरती का लाभ लेती हैं।
भस्म आरती में लोगों की श्रद्धा
भस्म आरती केवल पूजा का समय नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है।
भस्म आरती
आरती के दौरान पुजारी चिता की राख और गाय के कंड़ें, पीपल, पलाश, शमी और बेर की लड़कियों का भी उपयोग किया जाता है, मंत्रों का उच्चारण के साथ भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है।
परंपरा और आधुनिकता
महाकाल भस्म आरती में परंपरा का पालन और आधुनिकता दोनों ही देखी जा सकती है। विराट- अनुष्का जैसे सेलिब्रिटी इसे सोशल मीडिया और मीडिया कवरेज के माध्यम से साझा करते हैं, लेकिन परंपरा का सम्मान करते हैं और महिलाओं के घूंघट की प्रथा इसके सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है।
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