Cybercrime India: भारत बना स्कैमर्स का ‘गोल्डन मार्केट’! साइबर क्राइम के मामले में दूसरे नंबर पर; जानें टॉप 3 में कौन-कौन?
Cybercrime India: मेटा की मार्च 2026 रिपोर्ट के अनुसार साइबर क्राइम तेजी से बढ़ती ग्लोबल इंडस्ट्री बन चुका है. अमेरिका सबसे ज्यादा, भारत दूसरे और इजरायल तीसरे स्थान पर निशाना बन रहे हैं. जनरेटिव एआई से स्कैम और खतरनाक हुए हैं. भारत में सस्ता इंटरनेट, बढ़ता डिजिटल यूज और जागरूकता की कमी इसे आसान टारगेट बना रहे हैं.
साइबर क्राइम बना ग्लोबल खतरा
साइबर क्राइम अब केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि एक वैश्विक उद्योग बन चुका है. यह हर दिन लाखों लोगों को निशाना बना रहा है और तेजी से फैल रहा है. डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ-साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी ज्यादा एडवांस और खतरनाक हो गए हैं.
भारत बना दूसरा सबसे बड़ा टारगेट
मेटा की मार्च 2026 की एडवर्सेरियल थ्रेट रिपोर्ट के मुताबिक, भारत साइबर धोखाधड़ी के मामलों में दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा निशाना बनने वाला देश बन गया है. यह स्थिति देश में बढ़ते इंटरनेट यूजर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को दर्शाती है.
पहले नंबर पर अमेरिका
इस सूची में अमेरिका पहले स्थान पर है. इसकी मुख्य वजह है बड़ी संख्या में अंग्रेजी बोलने वाले यूजर्स और अत्यधिक डिजिटल गतिविधि. यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह अमेरिका को प्राथमिक लक्ष्य बनाते हैं.
तीसरे स्थान पर इजरायल
इजरायल इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर आता है. यहां रैनसमवेयर हमले और हैक्टिविस्ट गतिविधियां अधिक होती हैं. इसके अलावा, देश का अत्याधुनिक डिजिटल इकोसिस्टम भी इसे साइबर हमलों के लिए आकर्षक बनाता है.
AI से बढ़ा साइबर खतरा
साइबर अपराधी अब जेनरेटिव AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके जरिए वे नकली प्रोफाइल, डीपफेक वीडियो और पर्सनलाइज्ड स्कैम मैसेज तैयार करते हैं. ये तकनीक धोखाधड़ी को इतना वास्तविक बना देती है कि यूजर्स के लिए असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है.
भारत में बढ़ते जोखिम के कारण
भारत में साइबर क्राइम बढ़ने के पीछे कई कारण हैं, जैसे सस्ता इंटरनेट, स्मार्टफोन का तेजी से प्रसार और UPI जैसे डिजिटल पेमेंट्स का बढ़ता उपयोग. इसके साथ ही, डिजिटल जागरूकता की कमी भी एक बड़ी समस्या है, जिससे लोग आसानी से ठगी का शिकार बन जाते हैं.
संगठित गिरोह चला रहे हैं नेटवर्क
अब साइबर क्राइम केवल छोटे हैकर्स तक सीमित नहीं रहा. बड़े संगठित गिरोह इसे एक बिजनेस की तरह चला रहे हैं. ये गिरोह अक्सर दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों में सक्रिय होते हैं और बड़े पैमाने पर घोटालों को अंजाम देते हैं.