ISRO Gaganyaan Mission: चिनूक हेलीकॉप्टर से ड्रॉप, समंदर में लैंडिंग; ISRO का फुलप्रूफ प्लान तैयार
ISRO ADT-02 Test: ISRO ने गगनयान मिशन के तहत IADT-02 एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया. चिनूक हेलीकॉप्टर से डमी क्रू मॉड्यूल गिराकर पैराशूट और सुरक्षित लैंडिंग की जांच हुई. यह टेस्ट 2027 के मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में अहम कदम है.
ISRO की बड़ी उपलब्धि
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन के तहत एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है. श्रीहरिकोटा स्थित Satish Dhawan Space Centre से दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) सफलतापूर्वक पूरा किया गया. यह परीक्षण भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है. इस सफलता पर केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने ISRO टीम को बधाई दी.
टेस्ट का उद्देश्य और महत्व
इस परीक्षण का उद्देश्य उस क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग को परखना था, जिसमें अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौटेंगे. अंतरिक्ष से वापसी के दौरान कैप्सूल अत्यधिक गति से पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करता है. ऐसे में उसकी गति को नियंत्रित करना और सुरक्षित तरीके से लैंडिंग कराना बेहद जरूरी होता है. यह टेस्ट इस पूरी प्रक्रिया को वास्तविक परिस्थितियों में जांचने के लिए किया गया.
चिनूक हेलीकॉप्टर से ड्रॉप टेस्ट
इस परीक्षण में भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर का उपयोग किया गया. हेलीकॉप्टर ने लगभग 5,000 किलोग्राम वजन वाले डमी क्रू मॉड्यूल को हवा में उठाया. यह वजन असली गगनयान कैप्सूल के बराबर रखा गया था, ताकि वास्तविक परिस्थितियों का सटीक आकलन किया जा सके. हेलीकॉप्टर इसे 3 से 4 किलोमीटर की ऊंचाई तक लेकर गया और फिर समुद्र में गिराया गया.
पैराशूट सिस्टम की अहम भूमिका
इस टेस्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पैराशूट सिस्टम की जांच था. जैसे ही मॉड्यूल को गिराया गया, यह देखा गया कि क्या पैराशूट सही समय पर खुल रहे हैं और कैप्सूल की गति को नियंत्रित कर पा रहे हैं या नहीं. ISRO ने पैराशूट्स के एक क्रमिक सिस्टम का परीक्षण किया, जिससे कैप्सूल की स्पीड धीरे-धीरे कम हो सके और लैंडिंग सुरक्षित हो.
समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग और रिकवरी
टेस्ट के दौरान मॉड्यूल को समुद्र में उतारा गया, जहां यह सुनिश्चित किया गया कि लैंडिंग के समय कोई झटका न लगे. सुरक्षित लैंडिंग के बाद भारतीय नौसेना की टीम ने तुरंत मॉड्यूल को रिकवर किया और आगे की जांच के लिए किनारे पर ले गई. इस प्रक्रिया ने यह साबित किया कि भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी संभव है.
गगनयान मिशन की आगे की योजना
गगनयान मिशन को अब 2027 तक लॉन्च करने की योजना है. इससे पहले ISRO 2026 की पहली छमाही में एक मानवरहित मिशन भेजेगा, जिसमें ‘व्योममित्र’ नाम का ह्यूमनॉइड रोबोट अंतरिक्ष में जाएगा. यह मिशन रॉकेट, ऑर्बिटल मॉड्यूल और वापसी प्रक्रिया की पूरी टेस्टिंग करेगा. इसके बाद 2 से 3 भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को लो अर्थ ऑर्बिट में लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर तीन दिनों के लिए भेजा जाएगा, जो भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नई उपलब्धि होगी.