RakshaBandhan 2025: जानिए क्यों पुरानी परंपरा कहती है 3 या 5 गांठें ही लगानी चाहिए राखी में
RakshaBandhan 2025: रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की गहराई और सुरक्षा का प्रतीक है। राखी में बांधी गई गांठें केवल धागा नहीं, बल्कि एक-एक गांठ बहन की शुभकामनाओं और रक्षा की भावना का प्रतीक होती है। परंपरागत रूप से दो, तीन या पांच गांठें लगाना शुभ माना जाता है – प्रत्येक संख्या का अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है , आइए जानतें हैं इसके बारे में..
गांठ सिर्फ धागा नहीं
राखी की गांठ को अक्सर सिर्फ एक रस्म समझ लिया जाता है, लेकिन वास्तव में यह एक शुभ प्रतीक होती है। यह भाई और बहन के रिश्ते की मजबूती का संकेत होती है। हर गांठ एक वचन का प्रतीक होती है – सुरक्षा, प्रेम, और साथ निभाने का।
दो गांठ क्यों मानी जाती है शुभ?
दो गांठें लगाना सबसे सामान्य और सौम्य परंपरा मानी जाती है। पहली गांठ भाई की शारीरिक रक्षा के लिए और दूसरी उसकी मानसिक सुरक्षा के लिए लगाई जाती है। आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार, दो गांठों का जोड़ ऊर्जा संतुलन को दर्शाता है – शरीर और आत्मा के बीच का संतुलन।
तीन गांठों का धार्मिक महत्व
तीन गांठें लगाने की परंपरा का संबंध त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश – से जोड़ा जाता है। इसका अर्थ है कि भाई की रक्षा सृष्टि, पालन और संहार – तीनों शक्तियों द्वारा हो। तीन गांठें शक्ति, स्थिरता और सफलता का प्रतीक होती हैं। यह अंक शुभ और संतुलन का संकेत भी
पांच गांठों की विशेषता और परंपरा
पांच गांठों का महत्व पौराणिक काल से है। यह पंचतत्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश – से जुड़ा होता है। जब बहन पांच गांठें लगाकर राखी बांधती है, तो वह भाई की रक्षा के लिए सभी तत्वों से आशीर्वाद मांगती है।
गांठों की संख्या क्यों बदलती है हर परिवार में?
हर परिवार की परंपरा अलग होती है। कोई दो गांठें लगाता है, तो कोई तीन या पांच। इसका कारण उनके सांस्कृतिक विश्वास, पुश्तैनी रीति-रिवाज और धार्मिक पृष्ठभूमि से जुड़ा होता है।
राखी में गांठ बांधते समय क्या बोलना चाहिए?
जब बहन राखी में गांठ बांधती है, तो मन में या बोलकर कुछ शुभ मंत्र या कामनाएं करनी चाहिए। परंपरागत रूप से बोला जाने वाला मंत्र है –
"येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वाम् प्रतिबध्नामि, रक्षे मा चल मा चल।।"
Disclaimer
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