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Janmashtami 2025 Remedies: शनि और राहु के कष्ट दूर करने के लिए जन्माष्टमी का दिन क्यों है सबसे शुभ, जानें क्या करें और क्या न करें

Krishna Janmashtami 2025: जन्माष्टमी 2025 एक विशेष अवसर है जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में यह दिन न केवल भक्ति का प्रतीक है बल्कि शनि और राहु से जुड़ी परेशानियों को दूर करने का भी उत्तम समय माना जाता है। इस दिन किए गए विशेष उपाय से ग्रह दोष कम होते हैं, जीवन में सुख-शांति आती है और बाधाओं का अंत होता है ,आइए समझते हैं इसके बारें में..


By: Shivashakti Narayan Singh | Published: August 11, 2025 10:52:04 PM IST

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श्रीकृष्ण का जन्म

जन्माष्टमी की सबसे खास बात यह है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अर्धरात्रि के ठीक 12 बजे हुआ था, जब आकाश में सभी ग्रह-नक्षत्र विशेष योग बना रहे थे। इसलिए इस समय पूजन करना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ज्योतिष के अनुसार भी अत्यंत फलदायी होता है। मान्यता है कि इस समय श्रीकृष्ण की आराधना करने से जीवन में चल रहे शनि और राहु के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है।

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‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप

‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ एक शक्तिशाली मंत्र है, जो न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है बल्कि शनि और राहु जैसे कठिन ग्रहों के दुष्प्रभाव को भी कम करता है। यह मंत्र भगवान कृष्ण के 12 अक्षरों वाला द्वादशाक्षरी मंत्र है, जिसे महाभारत काल से ही मुक्ति और शांति का मंत्र माना गया है। जन्माष्टमी की रात इस मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

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गरीबों और गौसेवा में दान

दान करना भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है, और जन्माष्टमी के दिन इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन गरीबों, जरूरतमंदों और असहाय लोगों को अन्न, वस्त्र या धन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और शनि-राहु की कृपा बनी रहती है।

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तिल और काले कपड़े का दान

जन्माष्टमी के दिन तिल (विशेषकर काले तिल), तेल और काले वस्त्र का दान शनि ग्रह को प्रसन्न करने का एक सरल और प्रभावी उपाय है। शनि देव को काला रंग प्रिय है, और वे काले तिल और तेल के माध्यम से अपनी कृपा प्रदान करते हैं। अगर आपकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या राहु-केतु का दोष चल रहा है, तो यह उपाय विशेष रूप से लाभकारी होता है।

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तुलसी और मक्खन का भोग

भगवान कृष्ण को तुलसी और मक्खन का भोग लगाना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्रह दोष निवारण में भी सहायक माना गया है। तुलसी को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है, और यह राहु ग्रह के दुष्प्रभाव को कम करती है। वहीं, मक्खन भगवान कृष्ण का प्रिय आहार है, जो चंद्रमा ग्रह की शीतलता और शुद्धता का प्रतीक है।

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प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. inkhabar इसकी पुष्टि नहीं करता है