रोजाना की 7 ऐसी आदतें, जिससे चुपके से बढ़ रहा आपका ब्लड शुगर
Daily Habits: आप हेल्दी खाना खा सकते हैं, फिर भी आपका ब्लड शुगर बढ़ सकता है. उन रोजाना की आदतों के बारे में जानें जो चुपचाप ग्लूकोज बैलेंस को बिगाड़ती हैं और आसान लाइफस्टाइल में बदलाव करें.
जब स्वास्थ्य हमेशा स्टेबल नहीं होता (When health is not always stable)
बहुत से लोग पौष्टिक खाना खाते हैं लेकिन फिर भी उन्हें एनर्जी में कमी और क्रेविंग होती है. अक्सर ब्लड शुगर स्पाइक्स साफ तौर पर जंक फूड के बजाय रोजाना की आदतों से होते हैं, जिससे उन्हें नोटिस करना और कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है.
दिन की शुरुआत सिर्फ कार्ब्स से करें (Start your day with only carbs alone)
नाश्ते में सिर्फ कार्बोहाइड्रेट खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. डाइजेशन को धीमा करने के लिए प्रोटीन या हेल्दी फैट्स के बिना, ग्लूकोज तेजी से बढ़ता है और उतनी ही तेजी से गिरता है, जिससे थकान और भूख लगती है.
खाने के बजाय कैलोरी पीना (Drinking calories instead of eating them)
मीठे ड्रिंक्स, स्मूदी और मीठी कॉफी खून में तेजी से शुगर पहुंचाते हैं. लिक्विड चीज़ें ठोस खाने की तुलना में तेजी से पचती हैं, जिससे अचानक ग्लूकोज स्पाइक्स और क्रैश होने की संभावना बढ़ जाती है.
खाने के बाद बैठे रहना (Sitting down after eating)
खाने के बाद एक्टिव न रहने से ग्लूकोज का एब्जॉर्प्शन धीमा हो जाता है. हल्की-फुल्की मूवमेंट मांसपेशियों को शुगर को अच्छे से एब्जॉर्ब करने में मदद करती है, जबकि ज्यादा देर तक बैठे रहने से ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा समय तक बढ़ा रहता है.
पूरे दिन लगातार स्नैकिंग करना (Snacking continuously throughout the day)
बार-बार स्नैकिंग करने से इंसुलिन का लेवल ज्यादा रहता है और शरीर को रीसेट होने का समय नहीं मिलता. सही मील गैप के बिना लगातार खाने पर पौष्टिक स्नैक्स भी ग्लूकोज बैलेंस को बिगाड़ सकते हैं.
पूरी नींद न लेना (Lack of sleep)
कम या खराब क्वालिटी की नींद इंसुलिन सेंसिटिविटी को कम करती है. जब शरीर थका होता है, तो वह शुगर को अच्छे से मैनेज नहीं कर पाता, जिससे अगले दिन ब्लड शुगर स्पाइक्स होने की संभावना बढ़ जाती है.
तनाव और मीठे अंत (Stress and Sweet Endings)
लगातार स्ट्रेस से ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो ब्लड शुगर बढ़ाते हैं. खाने के बाद मीठा खाना, खासकर फाइबर या प्रोटीन के बिना, ग्लूकोज स्पाइक्स और एनर्जी में उतार-चढ़ाव को और बढ़ा सकता है.
छोटे बदलाव, बेहतर बैलेंस (Small changes, better balance)
कार्ब्स को प्रोटीन के साथ खाना, खाने के बाद घूमना, अच्छी नींद लेना और स्ट्रेस मैनेज करना ब्लड शुगर को स्टेबल कर सकता है. ये आसान रोजाना के बदलाव अक्सर सख्त डाइटिंग से ज़्यादा फर्क डालते हैं.
अस्वीकरण (Disclaimer)
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