What Is Lipid Profile: कार्डियोलॉजी में अब दिल की सेहत को सिर्फ पारंपरिक लिपिड प्रोफाइल तक सीमित नहीं रखा जा रहा है. नई रिसर्च बताती है कि सूजन, जेनेटिक मार्कर और विटामिन की कमी जैसे फैक्टर भी हार्ट डिज़ीज़ के जोखिम में बड़ी भूमिका निभाते हैं. कई मामलों में सामान्य कोलेस्ट्रॉल स्तर होने के बावजूद हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है. इसलिए विशेषज्ञ उन्नत ब्लड मार्कर्स, इंफ्लेमेशन टेस्ट और जेनेटिक संकेतकों की जांच पर जोर दे रहे हैं, ताकि हृदय जोखिम का अधिक सटीक, समय रहते और व्यापक आकलन किया जा सके बेहतर तरीके.
क्या है लिपिड प्रोफाइल?
लिपिड प्रोफाइल (या लिपिड पैनल) एक व्यापक ब्लड टेस्ट है जो आपके कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए आपके रक्त में विभिन्न वसा के स्तर को मापता है. इसमें आमतौर पर शामिल हैं:
LDL (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल: “खराब” कोलेस्ट्रॉल. उच्च स्तर धमनियों में प्लाक जमा होने का कारण बनते हैं.
HDL (हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल: “अच्छा” कोलेस्ट्रॉल. यह रक्त से LDL को हटाने में मदद करता है.
ट्राइग्लिसराइड्स: रक्त में एक प्रकार की वसा जिसका उपयोग ऊर्जा के लिए किया जाता है. उच्च स्तर हृदय रोग से जुड़े होते हैं.
कुल कोलेस्ट्रॉल: आपके रक्त में कोलेस्ट्रॉल का कुल योग.
VLDL (वेरी लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन): ट्राइग्लिसराइड्स ले जाता है, और उच्च स्तर भी हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं.
लिपिड प्रोफाइल दिल के दौरे से कैसे जुड़ा है?
एक खराब लिपिड प्रोफाइल—जिसे अक्सर डिस्लिपिडेमिया (उच्च LDL, कम HDL, और उच्च ट्राइग्लिसराइड्स) कहा जाता है—एथेरोस्क्लेरोसिस का एक प्राथमिक कारण है, जहाँ धमनियों की दीवारों के अंदर प्लाक जमा हो जाता है.
धमनी का संकुचन: प्लाक जमा होने से धमनियां संकरी हो जाती हैं, जिससे हृदय में रक्त प्रवाह प्रतिबंधित हो जाता है.
दिल के दौरे का खतरा: यदि कोई प्लाक फट जाता है, तो यह थक्का बना सकता है, जिससे रक्त प्रवाह पूरी तरह से अवरुद्ध हो सकता है और दिल का दौरा पड़ सकता है.
खामोश खतरा: ये असंतुलन बिना किसी लक्षण के वर्षों तक मौजूद रह सकते हैं, जिससे शुरुआती पहचान के लिए नियमित परीक्षण महत्वपूर्ण हो जाता है.
आप उच्च लिपिड और दिल के दौरे को कैसे रोक सकते हैं?
अपने लिपिड प्रोफाइल का सक्रिय प्रबंधन दिल के दौरे के जोखिम को काफी कम कर सकता है.
आहार में बदलाव: फल, सब्जियां, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा (जैसे, ओमेगा-3) से भरपूर आहार लें. संतृप्त वसा, ट्रांस वसा और अतिरिक्त शर्करा से बचें.
शारीरिक गतिविधि: साप्ताहिक रूप से कम से कम 150 मिनट मध्यम-तीव्रता वाले व्यायाम करें.
वजन प्रबंधन: स्वस्थ बॉडी मास इंडेक्स (BMI) बनाए रखने से कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार करने में मदद मिल सकती है.
धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान “अच्छे” HDL को कम करता है और धमनियों की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है.
शराब सीमित करें: अत्यधिक शराब पीने से ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ सकता है.
नियमित जांच: नियमित रूप से लिपिड टेस्ट करवाएं, खासकर अगर आपके परिवार में दिल की बीमारी, मोटापा या डायबिटीज की हिस्ट्री रही हो.
दवा: अगर लाइफस्टाइल में बदलाव काफी नहीं हैं, तो डॉक्टर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने के लिए स्टेटिन जैसी दवाएं लिख सकते हैं.
अस्वीकरण: अपने लिपिड प्रोफाइल के नतीजों को समझने और एक पर्सनलाइज़्ड, सुरक्षित और असरदार प्लान बनाने के लिए हमेशा डॉक्टर से सलाह लें.
Published by Shubahm Srivastava
January 31, 2026 05:47:34 PM IST

