15 की उम्र में डेब्यू, हिंदू लड़की से प्यार और फिर… जानें पूर्व भारतीय क्रिकेटर सबा करीम की दिल को छू लेने वाली लव स्टोरी
Saba Karim Love Story: भारतीय क्रिकेट में कई ऐसी कहानियां हैं, जो केवल रनों और विकेटों तक सीमित नहीं रहीं। एक ऐसा ही नाम है सबा करीम का, जिनका सफर बिहार के मैदानों से शुरू होकर भारतीय टीम और फिर कमेंट्री बॉक्स तक पहुँचा. आइए, तस्वीरों के जरिए देखते हैं उनके संघर्ष, सफलता और उनकी दिलचस्प प्रेम कहानी की एक अनकही झलक.
15 साल की उम्र में कदम
सबा करीम का जन्म 1967 में पटना में हुआ. उन्होंने महज 15 साल की उम्र में 1982-83 के रणजी ट्रॉफी सीजन से फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में डेब्यू कर सबको चौंका दिया था.
वो ऐतिहासिक दोहरा शतक
1990-91 के सीजन में ओडिशा के खिलाफ खेली गई 234 रनों की मैराथन पारी ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया. इसी प्रदर्शन के बाद उन्हें बंगाल की टीम से बुलावा आया.
रश्मि से दिल्ली में मुलाकात
1987 में सबा जब दिल्ली में थे, तब एक दोस्त के जरिए उनकी मुलाकात रश्मि से हुई. यहीं से दोनों की बातचीत और दोस्ती का सिलसिला शुरू हुआ.
धर्म और उम्र का फासला
रश्मि हिंदू थीं और सबा मुस्लिम. साथ ही रश्मि उम्र में सबा से बड़ी थीं. इन मतभेदों के कारण दोनों के परिवारों को इस रिश्ते पर आपत्ति थी.
जीत गया प्यार: जब परिवार ने दी मंजूरी
दो साल की लंबी जद्दोजहद और परिवारों को मनाने के बाद आखिरकार 1989 में दोनों ने निकाह किया. उन्होंने साबित किया कि प्यार के आगे मजहब की दीवारें छोटी हैं.
टीम इंडिया का सफर
सबा ने 1997 में भारत के लिए अपना वनडे डेब्यू किया. साल 2000 में उन्होंने अपना पहला टेस्ट मैच खेला, जो दुर्भाग्यवश उनके करियर का आखिरी इंटरनेशनल मैच भी रहा.
मैदान से मैनेजमेंट तक
चोट के कारण करियर जल्द खत्म होने के बाद भी वह क्रिकेट से दूर नहीं हुए. उन्होंने भारतीय टीम के नेशनल सिलेक्टर और बीसीसीआई के एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
कमेंट्री बॉक्स में बिखेर रहे हैं जलवा
क्रिकेट के मैदान और चयनकर्ता की कुर्सी के बाद, सबा करीम अब माइक्रोफोन थामे नजर आ रहे हैं. फिलहाल वह विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में अपनी शानदार कमेंट्री और सटीक विश्लेषण से दर्शकों का दिल जीत रहे हैं.