Categories: देश

Bikaneri Bhujia : जंग से स्वाद पर संकट… बीकानेरी भुजिया का स्टॉक ब्लॉक, 30 की बजाय 60 दिन में पहुंच रहा माल

Bikaneri Bhujia stock blocked : अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज संकट का असर अब बीकानेर के नमकीन उद्योग पर साफ दिख रहा है. शिपमेंट में देरी, लागत में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन बाधित होने से निर्यातकों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है.

Published by Ranjana Sharma
Bikaneri Bhujia stock blocked: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार पर प्रभाव ने अब भारत के छोटे व्यवसायों को भी झटका देना शुरू कर दिया है. ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी समुद्री संकट के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से झील पर संकट गहराया हुआ है, जिसका सीधा असर बीकानेर के प्रतिष्ठित उद्योगों पर पड़ रहा है. भुजिया और पापड़ जैसे उत्पादों की वैश्विक मांग तो बनी हुई है, लेकिन पिरामिड चेन बाधा होने से मुक्ति की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

लंबा हुआ समुद्री रास्ता, दोगुना हुआ समय

निर्यातकों के मुताबिक, पहले जो शिपमेंट 25-30 दिनों में खाड़ी और यूरोप पहुंच जाते थे, अब उन्हें 50-60 दिन तक लग रहे हैं. जहाजों को सुरक्षित रूट अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं. कंटेनरों की आवाजाही भी धीमी हो गई है, जिससे समय पर डिलीवरी बड़ी चुनौती बन गई है.

लागत में तेज उछाल, मुनाफा घटा

जंग का असर सिर्फ ट्रांसपोर्ट तक सीमित नहीं है. खाद्य तेल, पैकेजिंग और कच्चे माल की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है. कारोबारियों के अनुसार, पिछले एक महीने में तेल की कीमतों में करीब 20% तक इजाफा हुआ है, जबकि पैकेजिंग लागत 30-40% तक बढ़ गई है. इससे उत्पादन लागत बढ़ने के साथ मुनाफा घटता जा रहा है.

सप्लाई चेन बनी सबसे बड़ी बाधा

बीकानेर के भुजिया, पापड़ और मसाले की मांग खाड़ी देश और यूरोप में आज भी मजबूत है. संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर और बहरीन जैसे देशों में इन उत्पादों की अच्छी स्थिति है, लेकिन मंदी और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण व्यापार प्रभावित हो रहा है. निर्यातकों का कहना है कि कई कंटेनर बंदरगाहों पर या समुद्र में ही फंसे हुए हैं. आमतौर पर हर महीने 15-20 कंटेनर नमकीन और 60 कंटेनर अन्य उत्पाद निर्यात किए जाते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है. इससे व्यापारियों को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है.

कच्चे माल की सप्लाई भी प्रभावित

निर्यात के साथ-साथ आयात भी प्रभावित हुआ है. ताड़ तेल और सोयाबीन जैसे जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति में रुकावट आ रही है. पेट्रोलियम कीमतों में उछाल ने ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग दोनों को महंगा कर दिया है, जिससे उद्योग पर दोहरी मार पड़ रही है.
Ranjana Sharma
Published by Ranjana Sharma

Recent Posts

विपक्ष का प्लान हुआ फैल! CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज, लोकसभा अध्यक्ष का बड़ा फैसला

Chief Election Commissioner of India: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश…

April 6, 2026

बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत! प्रीपेड मीटर को लेकर सरकार का बड़ा फैसला; जानें किसको मिलेगा फायदा?

UP Latest News: संसद में भी यह मुद्दा उठा, जिस पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर…

April 6, 2026

Eye cancer: अब सूअर के स्पर्म से होगा आंखों के कैंसर का इलाज? वैज्ञानिकों का अनोखा प्रयोग चर्चा में

Eye cancer: सूअर के स्पर्म से जुड़े एक्सोसोम का इस्तेमाल कर वैज्ञानिकों ने आंखों के…

April 6, 2026

NDA से गठबंधन, फिर भी UP में सोलो प्लान! क्या चिराग पासवान बिगाड़ेंगे भाजपा का खेल?

UP Assembly Election 2027: प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासवान ने स्पष्ट किया कि केंद्र स्तर पर…

April 6, 2026

जन्मदिन से 6 दिन पहले मौत! पति से बहस के बाद उठाया खौफनाक कदम? इंडस्ट्री में शोक की लहर

South TV Actress Suicide: सुभाषिनी अपने पति के साथ बेंगलुरु में रहती थीं, लेकिन शूटिंग…

April 6, 2026