EU-India Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) डील हो गई है. इसकी जानकारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की है. इंडिया एनर्जी वीक को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि भारत और ईयू के बीच ट्रेड डील हो गई है. इसके साथ ही उन्होंने इसे मदर ऑफ ऑल डील्स बताया है. पीएम की मानें तो भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह डील वैश्विक जीडीपी का 25 प्रतिशत है. बताया जा रहा है कि इस डील से (FTA Deal) से भारत और यूरोपियन यूनियन अपने-अपने देश के मार्केट में पहुंच आसान बना सकेंगे.
दुनिया का भारत पर बढ़ेगा भरोसा
जानकारों का कहना है कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) होने से दुनिया के कई देशों का भरोसा बढ़ेगा. दोनों पिछले कई साल से एफटीए पर बात कर रहे थे. यूरोपियन यूनियन भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, दोनों के बीच सबसे ज्यादा व्यापार होता है.
FTA से दोनों पक्षों को कैसे फायदा होगा?
भारत और EU दोनों के बीच पहले से ही एक मजबूत वाणिज्यिक संबंध है, FY24 में द्विपक्षीय व्यापार का मूल्य $135 बिलियन था. यह साझेदारी पारस्परिक रूप से पूरक है. भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, IMF ने FY2024-26 के बीच 7.3% GDP वृद्धि का अनुमान लगाया है. इसकी 1.46 अरब की आबादी EU को एक विशाल और बढ़ता हुआ बाजार प्रदान करती है, जो अमेरिका या चीन से जुड़े संभावित व्यापार झटकों को कम करने में मदद करता है.
भारत के लिए, EU दुनिया के सबसे विकसित आर्थिक गुटों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका 2026 में संयुक्त GDP $22.52 ट्रिलियन था, या वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग छठा हिस्सा. इसका इंटीग्रेटेड मार्केट – जो शेंगेन ज़ोन जैसे सिस्टम पर आधारित है – भारतीय सामानों और सेवाओं को 27 देशों तक पहुंच देगा, जबकि एक FTA से ज़्यादा इन्वेस्टमेंट, को-डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी होंगे, जिससे भारत को चीन की ज़्यादा एडवांस्ड इकॉनमी के साथ अंतर कम करने में मदद मिलेगी.
EU-इंडिया FTA अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका क्यों दे सकता है?
यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा “सभी डील्स की जननी” कहे जाने वाले EU-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से डोनाल्ड ट्रंप को उनकी “अमेरिका फर्स्ट” टैरिफ रणनीति को सीधे चुनौती देकर एक बड़ा झटका लग सकता है. यह देखते हुए कि यह ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ और भारत और EU दोनों पर टैरिफ की और धमकियों के कारण था, दोनों पक्षों ने एक ऐसे FTA के लिए ज़ोर देना ज़रूरी समझा जो सप्लाई चेन में विविधता लाए और अमेरिका पर निर्भरता कम करें.
रणनीतिक रूप से, FTA मल्टीपोलैरिटी को तेज़ करता है, इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल साउथ में EU-भारत सहयोग को मज़बूत करता है, और अमेरिका की अप्रत्याशित नीतियों के खिलाफ एक बचाव के रूप में काम करता है, जिससे संभावित रूप से ट्रंप का वैश्विक प्रभाव कमज़ोर हो सकता है. इस विचार को एक भारतीय निवेशक ने X पोस्ट में दोहराया, जिन्होंने लिखा, “डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां अमेरिका पर निर्भर देशों के लिए एक सबक हो सकती हैं, जिससे उन्हें ज़्यादा निर्भरता के जोखिमों का एहसास होगा. आखिरकार, अमेरिका और ज़्यादा अलग-थलग पड़ सकता है, और दुनिया उसके बिना व्यापार करना सीख जाएगी”.
Published by Shubahm Srivastava
January 27, 2026 04:53:31 PM IST

