Darbhanga Maharaj: बिहार के राज परिवार की आखिरी महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार,12 जनवरी को निधन हो गया है. वह काफी समय से बीमार चल रही थीं. उन्होंने 96 साल की उम्र में स्थित राज परिवार के कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर मिलते ही पूरा परिवार शोक में डूब गया. महारानी के निधन को राज परिवार ने गहरी क्षति बताया है. निधन के बाद परिवार के सदस्य और शुभचिंतक बड़ी संख्या में कल्याणी निवास पहुंचे हैं. उनका अंतिम संस्कार श्यामा माई मंदिर परिसर में पारंपरिक विधि-विधान से किया गया. प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है.
1962 में महाराजा का निधन
महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन सादगी, सेवा और परंपरा का प्रतीक रहा है. उनका जाना सिर्फ राज परिवार ही नहीं बल्कि पूरे मिथिला के लिए शौक का कारण है. महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा रियासत के अंतिम शासक महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं. उनकी शादी 1940 के दशक में महाराज कामेश्वर सिंह से हुआ था. महाराज का निधन साल 1962 में हो गया था. उनकी पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी देवी का निधन 1976 में निधन हुआ था. वहीं दूसरी पत्नी का देहांत 1940 में हुआ था.
महारानी कामसुंदरी देवी
दरभंगा रियासत के अंतिम शासक महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी महारानी कामसुंदरी देवी थी. उनका जन्म 22 अक्टूबर 1932 को मधुबनी जिले के मंगरौनी गांव में हुआ था. केवल 8 साल की आयु में उनका विवाह महाराजा कामेश्वर सिंह से हुआ था. अक्टूबर 1962 में महाराज के निध के बाद उन्होंने अकेले अपना पूरा जीवन बिता दिया.
तीन शादियां, लेकिन निसंतान ही रहे राजा
दरभंगा राज के आखिरी राजा कामेश्वर सिंह की तीन शादियां हुईं, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं हुई. तीसरी पत्नी कामसुंदरी देवी ने अपनी बड़ी बेटी के बेटे कुमार कपिलेश्वर को दरभंगा राज का ट्रस्टी नियुक्त किया है. फिलहाल कपिलेश्वर दरभंगा राज के वारिस घोषित किए गए हैं. लेकिन ट्रस्टियों को लेकर संपत्ति का विवाद चल रहा है.
600 किलो सोना किया दान
साल 1962 में भारत-चीन युद्ध के समय सरकार ने दरभंगा के राजपरिवार से मदद मांगी थी, तब दरभंगा के इंद्रभवन मैदान में 15 मन यानी 600 किलो सोना तौला गया था और राजपरिवार की तरफ से दान किया गया था. दरभंगा राज ने अपना तीन-तीन एयरक्रॉफ्ट भी लड़ाई के लिए दान कर दिया. वहीं 90 एकड़ जमीन भी एयरपोर्ट को दान कर दी थी. इसी जमीन पर दरभंगा एयरपोर्ट बना है.
विश्वविद्यालयों के निर्माण में दिया दान
दरभंगा राज के राजकीय परिसर में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय अवस्थित है. विद्या के लिए इन्होंने अपना धन अर्पित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, कलकत्ता विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय के लिए भी राज परिवार ने दान दिया था. दरभंगा मेडिकल कॉलेज भी इसी परिवार की देन है.
दरभंगा राज के पास कितनी संपत्ति
दरभंगा राज के पास कितनी संपत्ति है, इसका सटीक विवरण मौजूद नहीं है. लेकिन इंडिया टुडे की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, राजा कामेश्वर सिंह के निधन के वक्त राज की संपत्ति 2,000 करोड़ रु. करीब है.
Published by Preeti Rajput
January 13, 2026 09:41:08 AM IST

