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Pratyangira Devi kaun hai: कौन हैं देवी प्रत्यंगिरा, जिनकी पूजा रावण और मेघनाद भी करते थे?

Pratyangira Devi kaun hai:  नवरात्र की नौ देवियों से परे भी हिंदू परंपरा में कई शक्तिशाली रूप हैं, जिनमें प्रत्यंगिरा देवी सबसे उग्र मानी जाती हैं. रामकथा के अनुसार मेघनाद उनकी पूजा करता था. पौराणिक कथाओं में इन्हें विष्णु, शिव और शक्ति का संयुक्त रूप बताया गया है, जिन्होंने देवताओं के बीच हुए भयंकर संघर्ष को शांत किया. तंत्र साधना में भी इनका विशेष महत्व है.

Published by Ranjana Sharma
Pratyangira Devi kaun hai: नवरात्र में आमतौर पर नौ देवियों की पूजा की जाती है, लेकिन हिंदू परंपरा में देवी के स्वरूप केवल नौ तक सीमित नहीं हैं. नवरात्र के अलावा भी देवी के कई सौम्य और उग्र रूपों की पूजा अलग-अलग क्षेत्रों में की जाती है. इन्हीं में एक अत्यंत रहस्यमयी और उग्र स्वरूप है-प्रत्यंगिरा देवी.

रामकथा में छिपा रहस्य: मेघनाद की आराध्य देवी

रामायण कथाओं के अनुसार रावण जहां भगवान शिव का परम भक्त था, वहीं उसका पुत्र मेघनाद तांत्रिक शक्तियों में उससे भी आगे माना जाता है. मेघनाद गुप्त विद्याओं, वशीकरण और तंत्र साधना में निपुण था और वह जिस देवी की आराधना करता था, उन्हें निकुंभला या निकुंबला देवी कहा जाता है, जिन्हें प्रत्यंगिरा का ही एक रूप माना जाता है. प्रत्यंगिरा देवी को शक्ति का अत्यंत उग्र स्वरूप माना जाता है. इन्हें नरसिंह का स्त्री रूप भी कहा जाता है और कई जगह इन्हें नारसिंही नाम से जाना जाता है.

इनका स्वरूप अद्भुत और भयानक

  • सिर शेर का
  • शरीर स्त्री का
  • पंख गरुड़ जैसे
  • पूंछ सर्प जैसी
यह देवी विष्णु, शिव और दुर्गा की संयुक्त शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं.

प्रत्यंगिरा का जन्म: जब संतुलन बिगड़ गया था

पौराणिक कथा के अनुसार, जब प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार प्रकट हुए, तब उनका क्रोध शांत नहीं हुआ. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए शिव ने शरभ अवतार लिया, जबकि विष्णु गंडभेरुंड रूप में आ गए. इन दोनों शक्तियों के टकराव से सृष्टि में असंतुलन पैदा हो गया. तभी लक्ष्मी ने अपनी समस्त शक्तियों—दुर्गा, सरस्वती और अन्य ऊर्जा को समाहित कर एक नए उग्र स्वरूप में अवतार लिया, जिसे प्रत्यंगिरा कहा गया.

कैसे थमा देवताओं का महायुद्ध

प्रत्यंगिरा देवी ने अपने भयानक स्वरूप से शरभ और गंडभेरुंड दोनों को नियंत्रित कर लिया. उनकी एक गर्जना से ही दोनों शक्तियां शांत हो गईं. इसके बाद देवी ने दोनों को अपने नियंत्रण में लेकर संतुलन स्थापित किया, जिससे विष्णु और शिव अपने मूल स्वरूप में लौट आए.

तंत्र परंपरा में विशेष स्थान

  • प्रत्यंगिरा देवी को तंत्र साधना में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.
  • ये 64 योगिनियों में शामिल हैं
  • सप्त भैरवी में भी इनका स्थान है
  • कालीकुल परंपरा में इन्हें उग्र देवी के रूप में पूजा जाता है
  • रावण की कुलदेवी के रूप में भी इनका उल्लेख मिलता है.
Ranjana Sharma
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