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काले हीरे को आखिर क्यों माना जाता है अपशगुन? इन 7 वजहों को जान रोंगटे हो जाएंगे खड़े

काले हीरे को आखिर क्यों माना जाता है अपशगुन? इन 7 वजहों को जान रोंगटे हो जाएंगे खड़े

'ब्लैक ओर्लोव' (Black Orlov), जिसे 'ब्रह्मा की आंख' (Eye of Brahma) भी कहा जाता है, दुनिया के सबसे शापित हीरों में से एक माना जाता है.

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, यह 195 कैरेट का हीरा दक्षिण भारत के पांडिचेरी में एक मंदिर में भगवान ब्रह्मा की मूर्ति की 'आंख' के रूप में जड़ा था, इसे चुराना देवता का अपमान माना जाता है.

ऐसा कहा जाता है कि जब एक भिक्षु ने इस हीरे को मूर्ति से निकाला, तो मंदिर के पुजारियों ने इसे रखने वाले हर व्यक्ति को 'शापित' होने का श्राप दिया था. 

साल 1932 में इस हीरे को अमेरिका लाने वाले हीरा व्यापारी जे.डब्ल्यू. पेरिस ने न्यूयॉर्क की एक गगनचुंबी इमारत से कूदकर जान दे दी.

तो वहीं, 1947 में दो रूसी राजकुमारियों और लियोनिला गैलिट्सिन-बैरियतिंस्की ने भी इस हीरे के संपर्क में आने के बाद ऊँची इमारतों से कूदकर आत्महत्या कर ली थी. 

प्राचीन काल से ही काले हीरे को सामान्य सफेद हीरों की तुलना में रहस्यमयी और नकारात्मक ऊर्जा से भरा माना जाता रहा है, जो डर की वजह बन जाता है. 

इतिहास गवाह है कि जो भी अमीर व्यक्ति या व्यापारी इस हीरे का मालिक बना, उसका या तो व्यापार डूब गया या उसने अपनी मानसिक शांति खो दी थी.

इस हीरे के भयानक इतिहास को देखते हुए, बाद के मालिकों ने इसके 'श्राप' को तोड़ने के लिए इसे तीन हिस्सों में काट दिया, ताकि इसकी नकारात्मक ऊर्जा को खत्म किया जा सके.

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