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Jagannath Temple Ratna Bhandar: जगन्नाथ पुरी के श्रीरत्न क्षेत्र में छिपा खजाना, जानिए क्या है रत्न भंडार में और कौन है इसका रक्षक?

Jagannath Temple Ratna Bhandar: पुरी के जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार चर्चा में है, जहां सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन और हीरे-जवाहरात होने की मान्यता है. इस रत्न भंडार की देखरेख देवी लक्ष्मी और उनके नाग सेवक पद्म और महापद्म द्वारा की जाती है, जो इसकी रक्षा करते हैं.

Published by Ranjana Sharma
Jagannath Temple Ratna Bhandar: पुरी, ओडिशा के भगवान जगन्नाथ के प्रसिद्ध मंदिर का रत्न भंडार एक बार फिर चर्चा में है. हाल ही में, रत्न भंडार में मौजूद संपत्ति की गिनती और सूचीकरण (इन्वेंट्री) प्रक्रिया शुरू की गई है. मंदिर के रत्न भंडार में सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन, हीरे और अन्य बहुमूल्य रत्न होने की मान्यता हमेशा से रही है. बुधवार को दोपहर 12 बजे के बाद विशेष शुभ मुहूर्त में इस रत्न भंडार का जांच कार्य शुरू हुआ. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस रत्न भंडार की देखरेख कौन करता है और इसे कौन संभालता है?

श्रीरत्न क्षेत्र की रक्षिका: देवी लक्ष्मी

12वीं सदी का जगन्नाथ मंदिर, जिसे पुराणों में धरती पर मौजूद वैकुंठ के रूप में वर्णित किया गया है, न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है बल्कि ऐतिहासिक रूप से यह अकूत धन-संपत्ति का केंद्र भी है. इस मंदिर को श्रीरत्न धाम या श्रीरत्नक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है “लक्ष्मी का क्षेत्र”, क्योंकि देवी लक्ष्मी, जो धन की देवी हैं, इस रत्न भंडार की मुख्य रक्षिका मानी जाती हैं.

माया की सुरक्षा नागों द्वारा की जाती है

धन और संपत्ति की रक्षा देवी लक्ष्मी की माया द्वारा की जाती है, और पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस माया की सुरक्षा नागों द्वारा की जाती है. भगवान विष्णु के नाग शेष और अनंत की तरह, देवी लक्ष्मी के दो नाग सेवक होते हैं: पद्म और महापद्म. इन नागों की जिम्मेदारी श्रीरत्न क्षेत्र के खजाने की रखवाली करना है. इतिहास में यह भी उल्लेखित है कि मगध के नंद वंश के सम्राट घनानंद को महापद्मनंद कहा जाता था, क्योंकि उसका खजाना महापद्म मूल्य का था.

रत्न भंडार की रक्षा करते नाग

पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिव के भक्तों में भी रत्न भंडार की सुरक्षा की जिम्मेदारी है. पुरी में स्थित लोकनाथ महादेव का मंदिर जगन्नाथ मंदिर से लगभग दो किलोमीटर दूर है, जहां भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान शिवलिंग की स्थापना की थी. लोकनाथ महादेव के नाग रत्न भंडार की सुरक्षा करते हैं. इन नागों का नाम पद्म और महापद्म है, जो इस खजाने की रक्षा करते हैं. यहां तक कि रत्न भंडार में सांपों के देखे जाने की भी खबरें आती रही हैं.

रत्न भंडार की गिनती प्रक्रिया

रत्न भंडार की गिनती प्रक्रिया बुधवार को SOP (Standard Operating Procedure) के तहत शुरू हुई, और इसे देवी लक्ष्मी एवं लोकनाथ देव से अनुमति लेने के बाद प्रारंभ किया गया. इस दौरान स्नेक हेल्पलाइन से स्नेक हैंडलर भी तैनात किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके. जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार केवल भव्यता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्राचीन परंपराओं, पौराणिक कथाओं और दैवीय शक्तियों से भी जुड़ा हुआ है, जो उसकी सुरक्षा और संरक्षण का हिस्सा हैं.
Ranjana Sharma
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