30 जनवरी, 1948 को नई दिल्ली में एक प्रार्थना सभा के बाद गोड्से ने गांधी जी के पैर छूने का प्रयास करते हुए गोली मार कर उनकी हत्या कर दी थी.
गांधीजी ने अपने जीवनकाल में कभी हवाई जहाज से यात्रा नहीं की. वह हमेशा ट्रेन से यात्रा करते थे.
ट्रेन यात्रा के दौरान गांधी जी का एक जूता नीचे गिर गया. उन्होंने फिर दूसरा जूता भी फेंक दिया. जब सहयात्री ने पूछा, तो उन्होंने कहा, जिसे ये जूते मिलेंगे, उसके पास पहनने के लिए एक जोड़ी तो होगी.
गांधीजी को फोटो खिंचवाने का बिलकुल भी शौक नहीं था.
गांधी की अंतिम यात्रा में दस लाख लोग शामिल हुए थे, और 15 लाख से ज़्यादा लोग रास्ते में खड़े थे.
गांधीजी अपने नकली दांत अपनी धोती में बांधकर रखते थे. वह उन्हें सिर्फ खाना खाते समय ही लगाते थे.