May 30, 2024
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सुभाष चंद्र बोस का ‘नेताजी’ से ‘देश नायक’ तक का सफर , जानिए कैसे मिली ये उपाधि

  • WRITTEN BY: Tamanna Sharma
  • LAST UPDATED : January 22, 2023, 11:49 am IST

नई दिल्ली। भारत की आजादी में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बता दें , उन्होंने ‘आजाद हिंद फौज’ की स्थापना भी की थी।भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों में सुभाष चंद्र बोस का नाम भी शामिल है। नेता जी का नारा ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ आज भी भारवासियों के भीतर राष्ट्रभक्ति को पैदा करता है।

अंग्रेजों की गुलामी से भारत को आजाद कराने के लिए नेताजी ने कई आंदोलन भी किए थे। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ छिड़े जंग की ज्वाला को और तेज करने के लिए आजाद हिंद फौज की स्थापना करी थी।

नेताजी के जीवन से जुडी कहानियां

बता दें , नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 में ओडिशा के कटक में हुआ था । उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती देवी था। सुभाष चंद्र बोस बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और पढ़ाई में भी तेज थे। उन्होंने इंग्लैंड के क्रैंब्रिज यूनिवर्सिटी से सिविल परीक्षा पास की थी।

लेकिन 1921 में जब उन्होंने अंग्रेजों द्वारा भारत में किए जाने शोषण के बारे में पता चला और उस बारे में पढ़ा तो उसी वक्त उन्होंने भारत को आजाद कराने का प्रण ले लिया था और इंग्लैंड में प्रशासनिक सेवा की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ अपने देश वापस आ गए थे और आजादी की मुहिम में पूरी तरह जुट गए। उनका नारा भी था ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’

सुभाष चंद्र बोस को कैसे मिली ‘नेताजी’ की उपाधि

बता दें , इस बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि जर्मन के तानाशाह अडोल्फ हिटलर ने ही सुभाष चंद्र बोस को सबसे पहली बार ‘नेताजी’ कहकर बुलाया था। इसके अलावा नेताजी के साथ ही सुषाभ चंद्र बोस को देश नायक भी कहा जाता है.और ऐसा कहा जात है कि देश नायक की उपाधि सुभाष चंद्र बोस को रवीन्द्रनाथ टैगोर ने दी थी।

नेता सुभाष चंद्र बोस के बारे में कुछ रोचक बातें

1. बता दें , साल 1942 में सुभाष चंद्र बोस हिटलर के पास गए और भारत को आजाद करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन हिटलर ने भारत की आजाद में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और उसने सुभाष चंद्र बोस को कोई भी स्पष्ट वचन भी नहीं दिया था।

2. नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सिविल परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त हुआ था और वे प्रशासनिक सेवा की प्रतिष्ठित नौकरी भी कर रहे थे। लेकिन देश की आजादी के लिए उन्होंने अपनी आरामदायक नौकरी को छोड़ने का फैसला किया और भारत लौट वपास लौट आए।

3. जलियांवाला बाग हत्याकांड के दिल दहला देने वाले दृश्य से सुभाष चंद्र बोस काफी विचलित हुए इसके बाद ही वे भारत की आजादी संग्राम में जुड़ गए थे।साल 1943 में बर्लिन में सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद रेडियो और फ्री इंडिया सेंट्रल की स्थापना भी की थी।

4. साल 1943 में ही आजाद हिंद बैंक ने 10 रुपए के सिक्के से लेकर 1 लाख रुपए के नोट जारी किए और एक लाख रुपए की नोट में नेताजी सुभाष चंद्र जी की तस्वीर भी छपी थी।

5. महात्मा गांधी को सुभाष चंद्र बोस ने ही ‘राष्ट्रपिता’ कह कर संबोधित किया था।

6. सुभाष चंद्र बोस को 1921 से 1941 के बीच में 11 बार देश के अलग-अलग जेल में कैद किया गया था।

7. सुभाष चंद्र बोस को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में दो बार अध्यक्ष के रूप में भी चुना गया था।

8. सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु की बात करें तो यह आज तक रहस्य बना हुआ है , क्योंकि आज तक उनकी मृत्यु से पर्दा नहीं उठ पाया है की उनकी मृत्यु कब और कैसे हुई थी। बता दें कि साल 1945 में जापान जाते समय सुभाष चंद्र बोस का विमान ताईवान में क्रेश हो गया था , लेकिन उनका शव किसी को नहीं मिला था।

 

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