Student’s Suicide in Kota: कोटा में छात्रों के बढ़ते आत्महत्या पर राज्यसभा में हुई यह मांग

नई दिल्ली: मंगलवार (5 दिसंबर) को राज्यसभा में शून्य काल के दौरान सदस्यों ने कई गंभीर मुद्दों पर सदन का ध्यान आकृष्ट किया। राज्यसभा में सदस्यों ने शैक्षणिक व कोचिंग संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या (Student’s Suicide in Kota) की घटनाओं में हो रही बढ़ोतरी पर चिंता जताई।

भाजपा सदस्य ने उठाया कोटा का मामला

भारतीय जनता पार्टी के सदस्य सुशील कुमार मोदी ने राज्यसभा में शून्यकाल में राजस्थान के कोटा स्थित कोचिंग संस्थानों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्रों के आत्महत्या (Student’s Suicide in Kota) के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई और सरकार से इसके कारणों का पता लगाने के लिए एक आयोग गठित किए जाने की मांग की।

सुशील कुमार मोदी ने कहा कि पिछले एक साल में सिर्फ कोटा में 26 छात्रों ने आत्महत्या किया। इंजीनियरिंग संस्थानों में भी बड़ी संख्या में छात्र आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह चिंता का विषय है। इसके बाद सुशील मोदी ने सदन में सवाल उठाया कि क्या छात्रों पर उत्तीर्ण होने का भारी दबाव उनके आत्महत्या का कारण है। इस दौरान उन्होंने सरकार से शिक्षण व कोचिंग संस्थानों में विशेषज्ञ और परामर्शदाताओं को भी बहाल करने की मांग की।

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ग्राम प्रधान व महापौर के लिए पेंशन की मांग

इसके अलावा आज सदन में सदस्यों द्वारा ग्राम प्रधान व महापौर जैसे छोटे जनप्रतिनिधियों को वेतन-भत्ते व पेंशन का लाभ देने के लिए आवश्यक संविधान संशोधन करने की मांग भी उठाई गई। साथ ही सदस्यों ने मनरेगा कानून के तहत राज्यों के लिए कोष जारी करने की मांग की है। बता दें कि भाजपा के राधामोहन दास अग्रवाल ने यह मांग की है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सांसद, केंद्र के मंत्री, राज्य सरकारों के मंत्री व विधायक को वेतन-भत्ते और पेंशन की व्यवस्था है, लेकिन दुख की बात है कि ग्राम प्रधान और मेयर जैसे जमीनी जन प्रतिनिधियों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। अग्रवाल ने आगे कहा कि संविधान के 73वें व 74वें अनुच्छेद में संशोधन कर इन जनप्रतिनिधियों के लिए वेतन-भत्ते और पेंशन की व्यवस्था की जानी चाहिए।

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