कारगिल युद्ध के साजिशकर्ता थे मुशर्रफ, 1965 में भारत के खिलाफ लड़े थे युद्ध

नई दिल्ली। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का आज निधन हो गया है। उन्होंने दुबई के एस अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। पाकिस्तान के राष्ट्रपति बनने से पहले ये देश के सेना प्रमुख थे। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध की साजिश इन्होंने ही रची थी।

21 साल की उम्र में जॉइन की आर्मी

परवेज मुशर्रफ 21 साल की उम्र में अपनी कॉलेज की पढ़ाई खत्म करने के बाद जूनियर अफसर के पद पर पाकिस्तानी आर्मी जॉइन कर ली थी। इन्होंने 1965 में भारत के खिलाफ युद्ध लड़ा था। इस युद्ध में पाकिस्तान को करारी हाल झेलनी पड़ी थी। हारने के बावजूद पाक सरकार ने मुशर्रफ को मेडल से नवाजा था।

कारगिल कब्जा करने की कसम खाई

बता दें कि इसके अलावा मुशर्रफ ने 1971 के युद्ध में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिसके कारण पाक सरकार ने इनको कई बार प्रमोट किया। साल 1998 में ये पाकिस्तानी आर्मी के जनरल बने और उन्होंने भारत के खिलाफ कारगिल की साजिश रची। हालांकि इनको इस युद्ध में भी मुंह की खानी पड़ी। परवेज ने अपनी जीवनी ‘इन द लाइन ऑफ फायर-अ मेमॉयर’ में लिखा है कि इन्होंने कारगिल पर कब्जा करने की कसम खाई थी। लेकिन नवाज शरीफ की वजह से ऐसा नहीं हो पाया।

एमाइलॉयडोसिस के कारण गई जान

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज के परिजनों ने बताया है कि, मुशर्रफ की जान एमाइलॉयडोसिस के कारण गई। इस बीमारी का उनका दुबई के अस्पताल में इलाज चल रहा था। बता दें कि 1999 में सफल सैन्य तख्तापलट के बाद परवेज पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के 10वें राष्ट्रपति थे। ये 20 जून 2001 से 18 अगस्त 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति पद पर रहे थे।

शरीर के अंग ने काम करना छोड़ दिया था

मुशर्रफ का पिछले कई महीनों से दुबई के अस्पताल में एमाइलॉयडोसिस नामक बीमारी का इलाज चल रहा था। उनके परिजनों ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी दी थी कि वो लंबे समय से इस बीमारी से जूझ रहे हैं और उनके शरीर के सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। अब रिकवरी की कोई गुंजाइश नहीं बची है।

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