मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए अड़े डीके शिवकुमार कैसे डिप्टी CM पर माने? जानिए अंदर की कहानी

बेंगलुरु/नई दिल्ली। कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री को लेकर बीते 13 मई से कांग्रेस पार्टी में चल रही माथापच्ची बुधवार देर रात खत्म हो गई. कांग्रेस आलाकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के सिर पर कर्नाटक का ताज पहनाने का फैसला किया है. वहीं डीके शिवकुमार के हाथ डिप्टी सीएम का पद आया है. कांग्रेस नेतृत्व के फैसले की जानकारी मिलते ही बेंगलुरु में सिद्धारमैया के आवास के बाहर जश्न का माहौल है. सिद्धारमैया के खेमे के लोग बेंगलुरु की सड़कों पर आतिशबाजी कर रहे हैं. उधर चार दिनों तक सीएम की कुर्सी के लिए अड़े डीके शिवकुमार को आखिरकार हाईकमान का फैसला मानना ही पड़ा.

कांग्रेस के संकटमोचक कहे जाने वाले डीके शिवकुमार को क्यों उपमुख्यमंत्री के पद से संतोष करना पड़ा? आइए जानते हैं अंदर की पूरी कहानी…

कैसे कमजोर हुई शिवकुमार की दावेदारी?

कांग्रेस ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 डीके शिवकुमार के नेतृत्व में लड़ा. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर शिवकुमार ने चुनाव में खूब मेहनत की. पार्टी के लगभग सभी बड़े चुनावी फैसलों में वह शामिल रहे. लेकिन जब चुनाव परिणाम में कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिला तो सीएम पद की कुर्सी सिद्धारमैया को दे दी गई. दरअसल कांग्रेस आलाकमान ने विधायकों की पसंद और नई सरकार की स्थिरता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है. बताया जाता है कि कांग्रेस के 135 नवनिर्वाचित विधायकों में से करीब 90 विधायक सिद्धारमैया को सीएम के रूप में देखना चाहते थे. इसके साथ ही सिद्धारमैया की लोकप्रियता और कुरुबा समाज में पकड़ ने भी उनका दावा ज्यादा मजबूत किया.

सिद्धारमैया के समर्थन में ज्यादा विधायक

बताया जा रहा है कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों के इनपुट के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया को सीएम बनाने का फैसला लिया. चुनाव परिणाम सामने आने के बाद बेंगलुरु पहुंचे 3 पर्यवेक्षक- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे, कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह और पूर्व महासचिव दीपक बाबरिया ने सभी विधायकों से वन-टू-वन बात की. इसके बाद दिल्ली वापस आकर उन्होंने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपी. इस रिपोर्ट में उन्होंने खड़गे को बताया कि कांग्रेस के करीब 90 विधायक सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं. इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राहुल गांधी से चर्चा कर नए सीएम के नाम का फैसला लिया.

2 सीएम के फॉर्मूले पर भी नहीं बनी बात

कांग्रेस हाईकमान पहले दो मुख्यमंत्री बनाने के फॉर्मूले पर विचार कर रहा था. सरकार के 5 साल के कार्यकाल में पहले तीन साल सिद्धारमैया और फिर आखिरी के दो साल के कार्यकाल में डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की बात पर सहमति भी बन गई थी, लेकिन शिवकुमार इसके लिए राजी नहीं हुए. उन्होंने दो सीएम के फॉर्मूले पर यह कहकर असहमति जता दी कि ये अन्य राज्यों में कामयाब नहीं हुआ है. डीके सीएम बनने को लेकर अड़े रहे. वहीं, सिद्धारमैया ने दिल्ली में डेरा जमा लिया, इधर दिल्ली में स्थित कांग्रेस अधयक्ष खड़गे के आवास पर मैराथन बैठकों का दौर जारी रहा. इस बीच गांधी परिवार के बुलावे पर शिवकुमार को भी दिल्ली आना पड़ा. राष्ट्रीय राजधानी में शिवकुमार खड़गे और राहुल गांधी से मिले. काफी मान मनौव्वल के बाद आखिरकार शिवकुमार डिप्टी सीएम बनने के लिए राजी हो गए.

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत

गौरतलब है कि, 13 मई को आए कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम में कांग्रेस पार्टी ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की. पार्टी को 224 में से 135 सीटें मिलीं. इसके बाद रविवार को बेंगलुरु में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें सभी विधायकों ने नेता चुनने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अधिकृत किया. बाद में कांग्रेस अध्यक्ष ने तीनों पर्यवेक्षकों से सभी विधायकों से एक-एक कर बात करने कहा. कांग्रेस विधायकों से वन-टू-वन बात करने के बाद पर्यवेक्षक दिल्ली आए और सोमवार को अपनी रिपोर्ट खड़गे को सौंपी. इसके बाद अब कांग्रेस आलाकमान यानी खड़गे और गांधी परिवार ने कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री के नाम तय किया है.

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