June 14, 2024
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35 सालों से बेमौसम बारिश रोकने के लिए किया जाता है ये टोटका, जानें राज

  • WRITTEN BY: Amisha Singh
  • LAST UPDATED : March 20, 2023, 9:27 pm IST

उज्जैन: देश के कई राज्यों में अचानक से मौसम में बदलाव आया है। ऐसे में बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। जहां लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है। हालांकि इस बारिश ने किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर दी। वहीं दूसरी ओर उज्जैन के किसान एक नया तरीका लेकर आए हैं, जिससे खेतों में उगने वाली फसल आंधी, तूफान और बारिश से नहीं डरती। दरअसल जिले में एक ऐसा गांव भी है। जहां पिछले 35 वर्षों से किसान बेमौसम बारिश और ओलों को रोकने के अनोखे तरीके से अपनी फसल की सुरक्षा करते आ रहे हैं।

इस टोटके से मौसम हुआ काबू

दरअसल, यह मामला उज्जैन जिले के मंगरोला गांव का है। यहां के किसानों का मानना ​​है कि अष्टमी गांव स्थित हनुमान मंदिर में पूजा करने के बाद उन्होंने अपनी फसल को ओलावृष्टि से बचाने के लिए हल को जमीन में दबा दिया था। फिर इस हल के ऊपर कंडा गोबर डालकर छलनी भी बांध दी जाती थी। ग्रामीणों का मानना ​​है कि इस तरीके को आजमाने से उनके गांव में कभी ओलावृष्टि नहीं हुई।

 

पौराणिक मान्यता क्या है?

 

वहीं आपको बता दें, गांव के किसान सज्जन सिंह का कहना है कि मंगरोला गांव में खेड़ापति हनुमान जी का मंदिर है। दरअसल, साल 1987 में पूरे शहर में हंगामा हुआ था। ओलावृष्टि से जब देश भर के खेतों में लगी फसल बर्बाद हो गई तो पशु-पक्षी भी इसकी चपेट में आ गए। इस कारण गांव में भय का माहौल पैदा हो गया है। तभी वहां के एक संत ने इससे बचने का निदान बताया। जब से ही इस टोटके को आजमाया जा रहा है।

उनका मानना है कि कहा कि हनुमान अष्टमी के दिन मंदिर के बाहर उल्टा उपाय करना चाहिए। इस उल्टे हल में गाय के गोबर से कंडा तैयार करना चाहिए और उसके ऊपर मंत्रोच्चारण के बाद आटे को छानने वाली छलनी को उलटे हल में रखना चाहिए। इसलिए पूरे शहर में कभी ओले नहीं गिरेंगे।

चबूतरा हुआ करता था, अब है बड़ा मंदिर

 

इस दौरान मंगरोला गांव के स्थानीय लोगों ने बताया कि उल्टे हल की स्थापना के समय इस स्थान पर कच्चा चबूतरा था, जिस पर उल्टा हल लगाया जाता था. बाद में गांव वालों ने ही मंदिर का निर्माण कराया। उसे बताएं कि तब से लेकर आज तक हनुमान अष्टमी के दिन गांव का मंदिर उल्टा होता है। हल चलाने से पहले रामायण का पाठ किया जाता है और हनुमान मंदिर में पूजा की जाती है।

 

 

 

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