नई दिल्ली, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करने वाले अमेरिकी आयोग, ‘यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ़्रीडम’ (USCIRF) द्वारा विश्व प्रेस आज़ादी दिवस के मौके पर किये गए आयोजन में भारत के लिए गंभीर बातें कही है.

पत्रकारों के लिए जताई चिंता

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले अमेरिकी आयोग ने विश्व प्रेस आज़ादी के विषय में बात करते हुए भारत के पत्रकारों की आज़ादी को लेकर चिंता जताई है. भारतीय पत्रकारों की स्वतंत्रता को लेकर अमेरिकी आयोग द्वारा इस मौके पर भारत की स्थिति को लेकर गंभीरता जताई जा रही है. यूएससीआईआरएफ़ (USCIRF) ने इस मौके पर कहा कि वह हमेशा उन पत्रकारों के साथ खड़ा रहेगा जो धार्मिक स्वतंत्रता और हिंसा को झेल रहे हैं.

ट्वीट कर भारत का किया ज़िक्र

इस आयोग के अमेरिकी पैनल द्वारा किये गए ट्वीट में भारत का खासतौर पर ज़िक्र मिला. ट्वीट के अनुसार कहा गया कि वो यहां उन सभी पत्रकारों के साथ खड़े हैं जिन्हें मुसलमान, ईसाइयों, दलित, सिखों और आदिवासियों के ख़िलाफ़ के साथ हो रहे अन्याय और हिंसा को रिपोर्ट करने की वजह से सरकार द्वारा निशाने पर लिया जा रहा है. साथ ही हिरासत में भी भेजा जा रहा है. इसके अलावा इस पैनल ने कुछ भारतीय पत्रकारों के नाम भी लिए हैं. इन पत्रकारों में, सिद्दीक़ कप्पन और किशोर राम का नाम भी शामिल है.

सिद्दीकी कप्पन के लिए उठाई आवाज़

मालूम हो सिद्दीकी कप्पन वह पत्रकार हैं जो एक दलित महिला के साथ हुए बलात्कार और हत्या को रिपोर्ट करते समय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था. मालूम हो वह इस घटना को कवर करने हाथरस जा रहे थे. उस समय कप्पन समेत तीन अन्य लोगों को मथुरा पुलिस ने ‘प्रिवेंटिव पावर’ के तहत हिरासत में लिया था. बता दें, यूपी पुलिस इस गिरफ्तारी को करने में सीआरपीसी की धारा 151 के तहत कामयाब हो पायी जिसमें पुलिस किसी अपराध की आशंका के कारण किसी को भी हिरासत में ले सकती है. अब कप्पन के साथ हुई इस गिरफ्तारी को लेकर अमेरिकी आयोग ने ट्वीट किया है. बता दें, सिद्दीकी कप्पन पर मुसलमानों को भड़काने का भी आरोप लगाया गया था.

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